झारखंड के हजारीबाग में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। हजारीबाग से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि हिंसा के मुद्दे को सदन में उठाया जाएगा।
भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने मंत्री इरफान अंसारी के बयान की निंदा करते हुए कहा, “मैं सिर्फ उनसे यही कहूंगा कि वह जिस पद पर बैठे हैं, उसका सम्मान करें। अगर हजारीबाग में कोई घटना घटी है तो उन्हें (इरफान अंसारी) यह कहना चाहिए था कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में जब-जब भाजपा की सरकार नहीं होती है तो हिंसा करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ जाता है। हजारीबाग की घटना को सदन में उठाया जाएगा। हम इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।”
बरकट्ठा से विधायक अमित यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि हजारीबाग में जो घटना घटी है, उसकी पहले से प्लानिंग की गई थी। एक विशेष समुदाय द्वारा हिंदुओं पर पथराव किया गया और उनकी गाड़ियों को भी तोड़ दिया गया।
उन्होंने कहा, “मैं पूरी घटना के बारे में बता देता हूं कि वहां महाशिवरात्रि के अवसर पर लाउडस्पीकर लगाया जा रहा था, उसी बीच कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग आए और उन्होंने ऐसा करने से मना किया। इसके बाद मामला थाने तक पहुंचा और उन्हें बता दिया गया कि महाशिवरात्रि के चलते लाउडस्पीकर बजेगा। जब मौके से प्रशासन चला गया तो कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। एक प्लानिंग के तहत घरों में रखे पत्थरों को बरसाया गया। काफी लोग इसमें चोटिल हुए हैं, इस घटना के चलते प्रशासन भी लाचार हो गया और उन्हें वहां से वापस लौटना पड़ा।”
अमित यादव ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हजारीबाग हिंसा के बाद 24 हिंदुओं पर मुकदमा दर्ज किया और लगातार उनकी खोजबीन की जा रही है। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज देखने चाहिए और इसके बाद निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
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