भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक डॉ. संजीव द्विवेदी ने बताया कि बुधवार सुबह 4:30 बजे तक अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश तट के पास, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में लगभग स्थिर बना हुआ था। इसके कारण तट से टकराने (लैंडफॉल) की प्रक्रिया लंबी खिंच गई।
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि यह चक्रवात 16.4° उत्तरी अक्षांश और 82.0° पूर्वी देशांतर के पास स्थित था। यह नरसपुर से लगभग 30 किमी पूर्व, यनम से 45 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम और काकीनाडा से 70 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में मौजूद था। इस चक्रवात में हवा की गति लगातार 120-130 किमी प्रति घंटा बनी हुई थी, जो झोंकों के साथ 145 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही थी। इसके पहले उत्तर-पश्चिम की ओर धीरे-धीरे आगे बढ़ने और फिर उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ने की संभावना थी। हालांकि चक्रवात के लगभग स्थिर बने रहने से इसके तट से टकराने की प्रक्रिया लंबी हो गई।
28 अक्टूबर का दिन दक्षिणी ओडिशा के लिए काफी अहम रहने की उम्मीद थी। चक्रवात का असर राज्य तक पहुंचने के कारण मलकानगिरी और कोरापुट जैसे जिलों में मौसम के खराब होने की आशंका थी। आईएमडी ने गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और नबरंगपुर के लिए ‘रेड वार्निंग’ जारी की थी। इसके तहत कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश और कई अन्य स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया था।
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हवा की गति 60-70 किमी प्रति घंटा रहने और झोंकों के साथ 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना थी। उन्होंने पहाड़ी इलाकों, खासकर कोरापुट जिले में भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाओं की चेतावनी दी। फूस के घरों और अन्य कमजोर ढांचों में रहने वाले लोगों को जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
दक्षिण ओडिशा के अन्य इलाकों के लिए भी ‘ऑरेंज’ चेतावनी जारी की गई थी। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि भुवनेश्वर और कटक में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है, खासकर सुबह और दोपहर के समय। द्विवेदी ने खासकर दक्षिण के जिलों में रहने वालों को सलाह दी कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं और ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें और खराब मौसम के दौरान बेवजह यात्रा करने से बचें।
बता दें कि ‘अर्नब’ ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश और यनम के तटों पर दस्तक देना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस दौरान हवा की अधिकतम गति 125-135 किमी प्रति घंटा रही, जबकि हवा के झोंकों की गति 150 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई।

