किन्नौर के रकछम चितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य में एक सींगदार लार्क पक्षी देखा गया है, जो इस क्षेत्र से इस प्रजाति का पहला औपचारिक दस्तावेजी रिकॉर्ड है। स्पष्ट फोटोग्राफिक साक्ष्यों द्वारा समर्थित यह दुर्लभ अवलोकन लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए. कार्तिक और डॉ. एमवीएलएस प्रवीणा द्वारा रकछम के ब्लॉक वन अधिकारी संतोष ठाकुर के नेतृत्व में जैव विविधता अन्वेषण के दौरान किया गया था।
अधिकारियों ने इस खोज को हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षियों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। संतोष ठाकुर ने कहा कि यह खोज न केवल अभयारण्य के लिए बल्कि क्षेत्र में पक्षियों की विविधता को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सराहन के संभागीय वन अधिकारी (वन्यजीव) अशोक नेगी ने बताया कि इस खोज से किन्नौर की जैव विविधता में एक और उपलब्धि जुड़ गई है, जहां अब तक 170 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में पक्षियों की उल्लेखनीय विविधता पाई जाती है, जिनमें स्थानिक प्रजातियां, प्रवासी पक्षी और उच्च ऊंचाई वाले आवासों में प्रजनन करने वाली कई प्रजातियां शामिल हैं।
नेगी ने आगे कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण वन्यजीव रिकॉर्ड क्षेत्र में पर्यावरण-पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा होंगे और साथ ही संरक्षण के प्रति जागरूकता भी मजबूत होगी।
लेफ्टिनेंट कर्नल कार्तिक ने कहा कि यह अभयारण्य जैव विविधता से भरपूर है और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किन्नौर के कई दूरस्थ हिस्से अभी भी अनछुए हैं और उनमें अधिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण और जैव विविधता अध्ययन की आवश्यकता है।

