मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कृषि विभाग को निर्देश दिया कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के विस्तृत आंकड़ों को 20 जनवरी तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि ऐसे किसानों का ब्लॉक-स्तरीय डेटाबेस तैयार और मैप किया जा सके।
यहां कृषि विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए युवाओं को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य भर में इस पद्धति को बढ़ावा देने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए सुखु ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा रहे हैं और उन्होंने घोषणा की कि वे इस महीने के अंत में हमीरपुर में आयोजित होने वाले एक सम्मेलन में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों के साथ बातचीत करेंगे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्का और कच्ची हल्दी से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का आटा ‘हिम चक्की आटा’, मक्के का आटा ‘हिम भोग मक्की आटा’ और कच्ची हल्दी ‘हिम हल्दी’ ब्रांड के तहत बेचा जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि पैकेजिंग पर समाप्ति तिथि और पोषक तत्वों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और पोषक तत्वों के आकलन के लिए एक विशेष इकाई गठित करने का आदेश दिया।
सुखु ने बताया कि प्राकृतिक रूप से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्का की खरीद की गई है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसी प्रकार, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्राकृतिक रूप से उगाई गई 2,123 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया गया है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य निर्धारित करने के बाद भी उत्साहजनक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इस वर्ष 1,629 किसानों से लगभग 2,422 क्विंटल हल्दी की खरीद का अनुमान है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कृषि विभाग राज्य भर में स्थित अपने 25 फार्मों में प्राकृतिक कृषि पद्धतियों से विभिन्न फसलों की खेती कर रहा है और उन्होंने ऐसे उत्पादों के बेहतर विपणन की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान कृषि मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने भी बहुमूल्य सुझाव दिए।

