हिमाचल प्रदेश के डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन विभाग (डीडीटी एंड जी) ने राज्य भर में लोक मित्र केंद्रों और आधार केंद्रों की निगरानी के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अधिसूचित की है। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता को मजबूत करना, सेवा वितरण में सुधार करना और नागरिकों को अधिक शुल्क वसूलने, खराब सेवा गुणवत्ता और अनधिकृत संचालन जैसी समस्याओं से बचाना है।
मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) अनियमितताओं जैसे कि अधिक शुल्क लेना, सेवाओं की अनुपलब्धता, परिचालन उल्लंघन, दुर्व्यवहार या धोखाधड़ी के मामलों में शिकायतों के निपटान और कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट ढांचा प्रस्तुत करती है। डीडीटी एंड जी के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने कहा, “यदि कोई लोक मित्र केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित सेवा दरों से अधिक शुल्क लेता पाया जाता है, तो उस पर कठोर दंड लगाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने पर लंबी अवधि के लिए निलंबन हो सकता है और यहां तक कि सीएससी आईडी को स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि दिशानिर्देशों में लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से की जाने वाली आधार संबंधी गतिविधियों पर भी सख्त नियंत्रण लगाया गया है। आधार ऑपरेटरों को केवल अधिकृत सरकारी परिसरों से ही कार्य करना होगा और उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा निर्धारित स्थान मानदंडों का पालन करना होगा।
डॉ. जिंदल ने कहा कि राज्य में लगभग 7,900 सक्रिय लोक मित्र केंद्र हैं जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

