विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मंगलवार को कांग्रेस पर चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं में अविश्वास पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर तब आरोप लगाती है जब उसे चुनावी हार का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “जब कांग्रेस हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में जीतती है, तो चुनाव आयोग से कोई समस्या नहीं होती, लेकिन जब पार्टी हार जाती है, तो वह वोट चोरी का आरोप लगाती है।”
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों के प्रयास विफल रहे हैं, जिसके कारण, उन्होंने आरोप लगाया, निराशा और संवैधानिक संस्थानों के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने के प्रयास हुए हैं।
ठाकुर ने तीन सदस्यीय चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि फैसले बहुमत से लिए गए थे और दावा किया कि अगर कोई असहमति नोट होता तो वह आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होता। उन्होंने उस कथित असहमति पर विवाद खड़ा करने पर सवाल उठाया, जो उनके अनुसार हुई ही नहीं थी।
ठाकुर ने चुनाव आयोग के इतिहास का भी हवाला दिया और कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने खुद के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों सुकुमार सेन, कल्याण सुंदरम, नागेंद्र सिंह, टी स्वामीनाथन, आरके त्रिवेदी, वीएस रमादेवी, टीएन शेषन और एमएस गिल का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद एमएस गिल कांग्रेस में शामिल हो गए, राज्यसभा में सेवा की और केंद्रीय मंत्री बने। आज चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही कांग्रेस को भी अपने राजनीतिक इतिहास को याद रखना चाहिए।”

