N1Live National हिंदू परंपरा शाकाहार तक सीमित नहीं, बंगाल के देवी भक्तों की भावना का करें सम्मान: संजय निरुपम
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हिंदू परंपरा शाकाहार तक सीमित नहीं, बंगाल के देवी भक्तों की भावना का करें सम्मान: संजय निरुपम

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज भोजन को लेकर चल रही बहस पर कहा कि हिंदू और सनातन परंपराओं को केवल शाकाहारी भोजन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। भारत में मांसाहार की परंपरा भी रही है और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी कुछ परंपराओं में इसका स्थान रहा है। निरुपम ने इस मुद्दे पर बंगाल के देवी भक्तों और हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही।

संजय निरुपम ने आईएएनएस से कहा कि वह बहुत ज्यादा मांसाहारी भोजन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन मांसाहार का विरोध करना भी उचित नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने नवरात्रि और नवमी के दौरान बलि की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से कुछ स्थानों पर देवी को बलि देने की परंपरा रही है और जिस पशु की बलि दी जाती है, उसके मांस को पकाकर प्रसाद के तौर पर देवी को अर्पित करने के बाद श्रद्धालु ग्रहण करते हैं। हिंदुस्तान कभी भी 100 फीसदी शाकाहारी देश नहीं रहा है। ऐसे जानवरों के मांस का विरोध किया जा सकता है जिनका समाज में सम्मान या पूजा की जाती है, लेकिन जिन परंपराओं में किसी पशु को देवी को अर्पित करने की मान्यता रही है, उनके खिलाफ जाने से विशेष रूप से बंगाल के देवी भक्तों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के सांसदों के मार्च पर संजय निरुपम ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के करीब डेढ़ से पौने दो सौ सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च किया और इसे लोकतंत्र बचाने का नाम दिया, लेकिन यह लोकतंत्र बचाने के बजाय राजनीतिक दलों और नेताओं को बचाने की कोशिश है। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग संविधान के प्रावधानों के तहत काम करते हैं। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उसके आयुक्त सरकार के अधीन काम नहीं करते। इसलिए किसी राजनीतिक दल के दबाव में चुनाव आयोग को काम करने वाली संस्था के तौर पर पेश करना उचित नहीं है।

निरुपम ने एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का अभियान बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से बनी मतदाता सूचियों में ऐसे लोगों के नाम मौजूद हो सकते हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो स्थान बदल चुके हैं या जिनके नाम एक से अधिक जगह दर्ज हैं। ऐसी विसंगतियों को दूर करना आवश्यक है ताकि चुनाव में वास्तविक और पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव चला रहा है और इसके जरिए अपनी चुनावी हार को छिपाने की कोशिश कर रहा है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है और उसका नाम मतदाता सूची में मौजूद था, तो उसका नाम हटाया जाना वोट चोरी नहीं कहा जा सकता। इसी तरह यदि किसी मतदाता का नाम कई जगह दर्ज है और उसे एक जगह रखा जा रहा है, तो इसे भी वोट चोरी का मामला बताना उचित नहीं है।

उन्होंने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों को दुरुस्त किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं जिनमें एक ही मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था। मतदाता सूची को सही और अद्यतन करने के लिए ऐसी कार्रवाई जरूरी है। एसआईआर बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्यों में चल रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर संजय निरुपम ने कहा कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है। जब कोई मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन होता है तो वह सब-ज्यूडिस होता है और अदालत के अंतिम फैसले से पहले उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक पद पर 25 वर्ष पूरे होने को लेकर संजय निरुपम ने उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष तक लगातार सक्रिय रहना और सार्वजनिक जीवन में काम करना आसान उपलब्धि नहीं है। नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया है। इस दौरान विकास और सुशासन से जुड़े कार्यक्रमों को लागू करने पर जोर दिया गया। उन्होंने पीएम मोदी को एक कठोर कार्यशैली वाला प्रशासक बताते हुए कहा कि उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों से योजनाओं को लागू करवाने पर लगातार ध्यान दिया। प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और उनके योगदान को आने वाले समय में याद किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी आगे भी देश के विकास और आम नागरिकों के कल्याण के लिए इसी तरह काम करते रहें।

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