बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन न सिर्फ अपनी फिल्मों, बल्कि अपने विचारों और लेखन के जरिए भी लोगों से लगातार जुड़े रहते हैं। वह पिछले कई वर्षों से अपने निजी ब्लॉग के माध्यम से जिंदगी, काम, समय, उम्र और तकनीक जैसे विषयों पर खुलकर अपने मन की बातें साझा करते रहे हैं। इस कड़ी में अपने नए ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने सीखने की प्रक्रिया, समय की रफ्तार और आज के तेजी से बदलते कामकाजी माहौल को लेकर गहरी बातें कहीं।
अपने ब्लॉग पोस्ट में बिग बी ने कहा कि इंसान हर दिन कुछ न कुछ नया सीखता है, लेकिन इसके साथ ही एक तरह का अफसोस भी जुड़ा रहता है। उन्होंने लिखा, ”कई बार ऐसा लगता है कि जो चीजें आज सीखनी पड़ रही हैं, काश वे बहुत पहले सीख ली होती। हालांकि जिन तकनीकों और प्रणालियों को आज समझने की कोशिश की जा रही है, वे पहले मौजूद ही नहीं थीं। उम्र बढ़ने के साथ सीखने की इच्छा, मेहनत और ऊर्जा में भी कमी आना स्वाभाविक है, और यही सच्चाई मुझे बार-बार सोचने पर मजबूर करती है।”
अमिताभ बच्चन ने आज के दौर में तकनीकी विकास की तेज रफ्तार पर भी बात की। उन्होंने कहा, ”नए-नए आविष्कार और सिस्टम इतनी तेजी से सामने आ रहे हैं कि जब तक कोई व्यक्ति उन्हें ठीक से समझना शुरू करता है, तब तक समय काफी आगे निकल चुका होता है। इस तेज बदलाव के कारण कई बार ऐसा महसूस होता है कि इंसान पीछे छूटता जा रहा है, खासकर तब जब उम्र के साथ नई चीजें सीखना और अपनाना आसान नहीं रह जाता।”
अपने हाल ही के अनुभवों का जिक्र करते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया, ”इन चर्चाओं से मुझे एक अहम सीख मिली। किसी भी काम में सबसे पहले उसकी बुनियाद को मजबूत करना जरूरी है। इसके बाद उस काम को आगे बढ़ाने के लिए नए जमाने के हुनरमंद, तकनीकी रूप से दक्ष और विशेषज्ञ लोगों को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। इससे न केवल काम बेहतर होता है, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होती है।”
ब्लॉग में उन्होंने कहा, ”अगर किसी व्यक्ति को कोई काम खुद नहीं आता है, तो इसमें शर्म या परेशानी की कोई बात नहीं होनी चाहिए। इसे स्वीकार करना ही समझदारी है। इसके बाद उस काम को जानने और समझने वाले लोगों के साथ पूरा किया जा सकता है। केवल इस वजह से किसी काम को ठुकरा देना कि वह खुद उस क्षेत्र में पारंगत नहीं है, सही सोच नहीं है। बेहतर यह है कि काम लिया जाए और सही लोगों की मदद से उसे पूरा कराया जाए।”
अमिताभ बच्चन ने माना, ”विशेषज्ञों को रखने में खर्च जरूर आता है, लेकिन इसके बावजूद यह तरीका ज्यादा फायदेमंद है। इस प्रक्रिया में काम की जिम्मेदारी और नियंत्रण आपके पास रहता है, जबकि तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को विशेषज्ञ संभालते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में इसके लिए ‘आउटसोर्सिंग’ शब्द का इस्तेमाल किया।
उन्होंने आउटसोर्सिंग का मतलब समझाते हुए लिखा कि इसमें काम आपके नाम से होता है, लेकिन उसे करने के लिए ज्यादा काबिल और जानकार लोगों को शुल्क देकर जिम्मेदारी दी जाती है। इससे बड़े स्तर पर काम करना आसान हो जाता है और व्यक्ति खुद हर चीज जानने के दबाव से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा, ”पुराने समय में अगर किसी को कोई काम नहीं आता था, तो वह सिर्फ अफसोस करता था और उस काम को करने का मौका ही छोड़ देता था, लेकिन आज के समय में आउटसोर्सिंग जैसी व्यवस्था ने इस सोच को बदल दिया है।”
अपने ब्लॉग के आखिर में अमिताभ बच्चन ने आधुनिक तकनीक की तारीफ करते हुए बताया कि जब वह सही शब्द खोजने में अटक जाते हैं, तो एआई का सहारा लेते हैं। कुछ ही सेकंड में उन्हें सही जवाब मिल जाता है। उन्होंने इसे आज के दौर की बड़ी सुविधा बताया और माना कि ऐसे डिजिटल टूल्स ने सीखने और समझने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बना दिया है।


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