दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा शेयर किए गए वीडियो मामले को लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंजाब पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस द्वारा 10 दिन का समय मांगा जाना केवल गुमराह करने का प्रयास है। इस पर विधानसभा ने 15 जनवरी तक पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विपक्षी दल सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचाने और षड्यंत्र करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो की फोरेंसिक जांच करना दिल्ली विधानसभा का काम था, लेकिन पंजाब पुलिस ने यह जांच कैसे करवा ली जबकि ओरिजिनल दस्तावेज दिल्ली विधानसभा के पास थे? अगर पंजाब सरकार जांच कराना चाहती थी, तो दिल्ली विधानसभा को सूचित क्यों नहीं किया गया?
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पंजाब सरकार और संबंधित राजनीतिक दल केवल बरगलाने का काम कर रहे हैं। सदन की कार्रवाई तीन दिन तक बाधित रही। वीडियो को फोरेंसिक टीम को जांच के लिए भेजा गया है, लेकिन पंजाब पुलिस सदन की जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दबाव में एफआईआर दर्ज करवाई गई।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस के डीजीपी ने 10 दिन का समय मांगा था, लेकिन यह समय अनुपयुक्त था, इसलिए दिल्ली विधानसभा ने केवल तीन दिन का समय दिया। तीन दिन में पंजाब पुलिस को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दल जो विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में हैं, वह षड्यंत्र कर रहे हैं। बिना आधार के एफआईआर कैसे हुई और जब दिल्ली विधानसभा से वीडियो मांगा ही नहीं गया तो पंजाब पुलिस किस वीडियो की जांच कर रही है?
बता दें कि दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी का एक वीडियो शेयर कर गुरुओं का अपमान करने का आरोप लगाया था। दिल्ली विधानसभा के इस वीडियो को लेकर पंजाब पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की है। इसी पर दिल्ली विधानसभा स्पीकर ने सवाल उठाया है।


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