भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), ऊना ने IIT-दिल्ली के क्वांटम मैटेरियल्स एंड डिवाइसेस (QMD) फाउंडेशन के सहयोग से राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के अंतर्गत ‘क्वांटाराइज’ नामक क्वांटम जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य उभरती क्वांटम प्रौद्योगिकियों के बारे में जागरूकता पैदा करना और छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों को विज्ञान और इंजीनियरिंग के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से एक के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करना था।
कार्यशाला का संयुक्त उद्घाटन IIIT-ऊना के निदेशक प्रोफेसर मनीष गौर और QMD फाउंडेशन के निदेशक एवं IIT-दिल्ली के एसोसिएट डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रोफेसर राजेंद्र सिंह ने किया। हिमाचल प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. अभिषेक जैन उद्घाटन सत्र में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रोफेसर मनीष गौर ने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर शोध को आगे बढ़ाने और उन्हें विकसित करने के लिए भारत का प्रमुख कार्यक्रम है। 2023-2031 की अवधि के लिए 6,003.65 करोड़ रुपये के बजट से समर्थित इस मिशन का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार, संवेदन और उन्नत क्वांटम सामग्री के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाना है।
IIIT के निदेशक ने विज्ञान, इंजीनियरिंग और नवाचार के भविष्य को आकार देने में क्वांटम प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों में क्वांटम सामग्री, सेमीकंडक्टर हेटरोस्ट्रक्चर, एकीकृत क्वांटम फोटोनिक्स, क्वांटम सेंसिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, औद्योगिक अनुप्रयोग और तेजी से विकसित हो रहे क्वांटम प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कैरियर के अवसरों को शामिल किया गया।
इस कार्यशाला में प्लाक्षा विश्वविद्यालय के डॉ. प्रवीण कुमार, क्यूएमडी फाउंडेशन के डॉ. शिव कुमार, आईआईटी-रुड़की के प्रोफेसर राजेश कुमार, क्वानस्ट्रा के डॉ. विदुर राज, स्विट्जरलैंड के क्यूजेब्रे के डॉ. निशांत डोगरा और क्यूएमडी फाउंडेशन के अन्य विशेषज्ञों सहित प्रतिष्ठित वक्ताओं द्वारा व्याख्यान दिए गए। कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण व्यावहारिक प्रदर्शन सत्र था, जिसमें प्रतिभागियों को क्वांटम सिमुलेशन उपकरणों और उभरती प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
प्रोफेसर गौर ने कहा कि IIIT-ऊना राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप अत्याधुनिक अनुसंधान और अंतःविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. जैन ने छात्रों और शोधकर्ताओं को अग्रणी प्रौद्योगिकियों से सक्रिय रूप से जुड़ने और भारत की तकनीकी प्रगति में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रोफेसर सिंह ने QMD फाउंडेशन के दृष्टिकोण और अनुसंधान, शिक्षा, उद्योग सहयोग और क्षमता निर्माण के माध्यम से भारत के क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

