N1Live Punjab पंजाब में महिलाओं को भगवंत सिंह मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित एवं समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच का लाभ*
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पंजाब में महिलाओं को भगवंत सिंह मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित एवं समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच का लाभ*

From dialysis to cancer treatment, the Chief Minister's Health Scheme is providing vital healthcare services without any financial burden.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 22 जून | स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत किए गए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) मामलों में से 57 प्रतिशत गर्भावस्था के पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए। अब तक दर्ज 323 कैशलेस प्रक्रियाओं, जिनकी कुल लागत 14.86 लाख रुपये रही, में से 185 मामले शुरुआती गर्भावस्था के दौरान किए गए। यह राज्य भर के 800 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में समय पर और सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुँच को दर्शाता है।

गर्भपात का निर्णय कई व्यक्तिगत, चिकित्सकीय और सामाजिक-आर्थिक कारणों से प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए एमटीपी मामलों की संख्या कुल मामलों के आधे से अधिक रही, जिससे यह योजना के अंतर्गत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली श्रेणी बन गई है।

ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत गर्भसमापन (एमटीपी) सेवाओं की कैशलेस सुविधा का दायरा बढ़ाया है। अब महिलाएँ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी बिना ख़र्च किए ये सेवाएँ प्राप्त कर सकती हैं, जिससे पूरे पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच और आसान हो गई है।

आंकड़े संकेत देते हैं कि अधिकांश लाभार्थी गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में ही गर्भपात सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जब चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ कम जटिल होती हैं और स्वास्थ्य ज़ोखिम भी कम होते हैं।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के 800 से अधिक सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में एमटीपी सेवाएँ कैशलेस उपलब्ध हैं। इस योजना का उद्देश्य लोगों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम करना और समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के हालिया विस्तार का उद्देश्य सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाना और उपचार में होने वाली देरी को कम करना है। उन्होंने कहा, “सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस सेवाएँ उपलब्ध करवाने का उद्देश्य समय पर उपचार सुनिश्चित करना और देरी से हस्तक्षेप के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को कम करना है।”

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सकीय निगरानी में समय पर गर्भपात सेवाओं तक पहुँच स्वास्थ्य ज़ोखिमों को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता कौशल्या अस्पताल की सीनियर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रमिता अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित गर्भकाल सीमा के भीतर चिकित्सकीय निगरानी में किया गया गर्भसमापन सुरक्षित और प्रभावी होता है।

उन्होंने कहा कि उपचार लेने में देरी अक्सर आर्थिक कठिनाइयों, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाओं से जुड़ी होती है, जिसके कारण कई बार महिलाएँ असुरक्षित तरीकों या स्वयं दवा लेने का सहारा लेती हैं। उन्होंने कहा, “सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी दवा या प्रक्रिया से पहले प्रत्येक मामले का उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।”

डॉ. रमिता अग्रवाल ने गर्भपात करवाने के कुछ सामान्य कारण भी साझा किए:

गर्भनिरोधक साधनों का प्रभावी न होना : कंडोम, आईयूडी या अन्य गर्भनिरोधक साधनों का अपेक्षित रूप से प्रभावी न होना।

अनियोजित या अनचाहा गर्भधारण: जब महिला या दंपत्ति बच्चे के लिए तैयार न हों।

आर्थिक कारण: प्रसव और बच्चे के पालन-पोषण से जुड़े ख़र्चों को लेकर चिंताएँ ।

माँ के स्वास्थ्य संबंधी ज़ोखिम: गर्भावस्था जारी रहने से महिला के शारीरिक स्वास्थ्य पर ख़तरा होना।

भ्रूण में गंभीर असामान्यताएँ : भ्रूण में गंभीर जन्मजात या चिकित्सकीय समस्याओं का पता चलना।

व्यक्तिगत, शैक्षणिक या करियर संबंधी कारण: गर्भावस्था का पढ़ाई, नौकरी या जीवन की अन्य योजनाओं पर प्रभाव पड़ना।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का विस्तार प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह आर्थिक बाधाओं को कम करके और संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में मदद कर रहा है।

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