January 24, 2026
National

दिल्ली में ‘शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन, हर्ष मल्होत्रा बोले- कार्यक्रम में भारत की संस्कृति का एक लघु रूप देखने को मिला

Inaugurating ‘Shabdosav 2026’ in Delhi, Harsh Malhotra said – a microcosm of Indian culture was seen in the program.

दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन किया। ‘वंदे मातरम’ गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख नेता मौजूद रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यहां भारत की संस्कृति का एक लघु रूप देखने को मिला है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हजारों साल पहले जब भारत विश्व गुरु था, तब दुनियाभर के लोग नालंदा और तक्षशिला में रिसर्च के लिए आते थे। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति में बदलाव किया है, उसके अंतर्गत भी शिक्षा के साथ-साथ भारत की संस्कृति को युवाओं में प्रतिपादित करने का काम किया गया है। शिक्षा को स्किल के साथ जोड़ा गया है।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश है। यह दुनिया में कहीं दिखाई नहीं देता है। देश के अंदर 340 से ज्यादा जीवंत भाषाएं और 1600 से ज्यादा बोलियां हैं। यह भारत की संस्कृति का प्रदर्शन है।

कपिल मिश्रा ने ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में राजधानी को वैचारिक आतंकवाद का गढ़ बनाने के प्रयास किए गए। दिल्ली में कला एवं संस्कृति खत्म हो चुकी थी या फिर देश विरोधी और धर्म विरोधी दिशा में जा रही थी। आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में इसे बदलने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों में कला एवं संस्कृति विभाग ने कई भव्य और दिव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया, जो पिछली सरकारों में कभी देखने को नहीं मिला। इसी क्रम में दिल्ली में ‘शब्दोत्सव’ जैसा कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। हमने दिल्ली को नक्सली विचारधारा, झूठे इतिहास और धर्म विरोधी सोच से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया है। इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ से इसकी शुरुआत कर रहे हैं।

कपिल मिश्रा ने कहा कि जब कोई पत्थर पुलिस, सेना या मंदिर के ऊपर उठता है, तो वह पत्थर हाथ में बाद में आता है, पहले दिमाग में आता है। जब कोई नक्सली या जिहादी आतंकवादी कोई बंदूक उठाता या डॉक्टर होकर भी बम बनकर फटने को तैयार हो जाता है, तो वह बम हाथ में बाद में आता है, जबकि दिमाग में उसे पहले ही रखा जाता है। दिमागों में बम-बंदूक रखने के विचार आतंकवाद के खिलाफ दिल्ली का यह कार्यक्रम ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ है।

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