राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत न सिर्फ लोकतंत्र की जननी रही है, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा और पारदर्शी लोकतंत्र भी है। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के सभी लोकतंत्र मानते हैं कि शुद्ध मतदाता सूची सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के समूह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (इंटरनेशनल आईडीईए) ने भारत को अध्यक्ष के रूप में स्वीकार किया। यह सम्मान भारत की भरोसेमंद चुनावी प्रणाली पर लोकतांत्रिक दुनिया के बढ़ते हुए विश्वास को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत चुनाव आयोग ने नई दिल्ली में लोकतंत्र और चुनावी प्रबंधन के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय महासंगम का आयोजन किया। लगभग 70 लोकतांत्रिक देशों ने हिस्सा लेकर न केवल एक नया कीर्तिमान बनाया, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक विरासत और भारतीय चुनावों की मजबूत, विस्तृत और पारदर्शी कार्य प्रणाली को जाना, समझा और सराहा। तीन दिन चले इस आयोजन के समापन पर भारत की अगुवाई में सभी देशों ने ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को अपनाया।
सीईसी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा स्थापित भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान—आईआईआईडीईएम, अब लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े प्रशिक्षण संस्थान के रूप में उभर रहा है.
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए ईसीआईनेट के वैश्विक लॉन्च ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया और अनेक देशों ने ऐसी प्रणाली अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय मतदाता दिवस के इस पावन अवसर पर मैं भारत के प्रत्येक मतदाता को नमन करता हूं। आपकी भागीदारी से ही हमारा लोकतंत्र जीवंत है। आपका मतदान ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।”
अंत में उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम लोकतंत्र को केवल अपनाएं नहीं, उसे जिएं, उसे संजोएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक सशक्त बनाएं।”


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