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आरपीएफ प्रशिक्षुओं के लिए भारतीय सेना ने आयोजित की विशेष सीआईईडी ट्रेनिंग

Indian Army conducts special CIED training for RPF trainees

जगजीवन राम राष्ट्रीय रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) अकादमी लखनऊ में आपदा प्रबंधन कोर्स कर रहे आरपीएफ के 42 प्रशिक्षुओं के लिए भारतीय सेना की 201 काउंटर एक्सप्लोसिव डिवाइस यूनिट (सीईडीयू) ने बाराबंकी जिले के शिंगारा ट्रेनिंग स्कूल में एक दिन की विशेष काउंटर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (सीआईईडी) ट्रेनिंग का आयोजन किया। यह कार्यक्रम रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था।

ट्रेनिंग का मुख्य फोकस आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से जुड़े खतरों को रोकने, उनके प्रभाव को कम करने और ऐसी घटनाओं पर तुरंत प्रभावी प्रतिक्रिया देने पर रहा। साथ ही रेलवे के माहौल में आरपीएफ की फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षुओं ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया, जिनमें टेबल-टॉप एक्सरसाइज, ग्रुप डिस्कशन, फील्ड ड्रिल, संयुक्त अभ्यास और डिटेक्शन, सर्च तथा रिस्पॉन्स प्रक्रियाओं पर व्यावहारिक सत्र शामिल थे।

ट्रेनिंग के दौरान रेल बोगी और प्लेटफॉर्म की सघन सर्चिंग के लिए विशेष अभ्यास कराए गए। संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाने पर तुरंत अपनाए जाने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल, पोस्ट-ब्लास्ट जांच की पूरी प्रक्रिया और संबंधित सावधानियों पर गहराई से जोर दिया गया। प्रशिक्षण में आईईडी के विभिन्न प्रकारों के यंत्रवत मॉडल दिखाए गए और आधुनिक उपकरणों जैसे बॉम्ब सूट, इंफ्रारेड कैमरा, डिटेक्शन सिस्टम, जामर और अन्य तकनीकी साधनों से परिचय कराया गया। इन अभ्यासों से प्रशिक्षुओं को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।

इस पहल से आरपीएफ के प्रशिक्षुओं की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और भारतीय सेना तथा आरपीएफ के बीच अंतर-एजेंसी समन्वय और सहयोग को और मजबूती मिली। प्रतिभागियों ने यूनिट के द्वारा दिए गए व्यावहारिक अनुभव, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और उच्च स्तर के पेशेवर निर्देशों की खूब सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह ट्रेनिंग आईईडी जैसी आकस्मिक घटनाओं से निपटने में तकनीकी जागरूकता, तैयारी और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बेहद मूल्यवान साबित हुई है। यह कार्यक्रम रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की भूमिका को बेहतर बनाने और संभावित खतरों के प्रति सतर्कता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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