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भारतीय नौसेना का युद्धपोत तारागिरी, तुरंत देगा खतरों का मुंहतोड़ जवाब

Indian Navy's warship Taragiri will give a befitting reply to threats immediately

31 मार्च । भारतीय नौसेना को एक और नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत, ‘तारागिरी’ मिलने जा रहा है। मंगलवार को साझा की गई एक जानकारी में नौसेना ने बताया कि इस युद्धपोत को 3 अप्रैल को कमीशन किया जाएगा।

विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह युद्धपोत, ‘तारागिरी’ को नौसेना में शामिल करेंगे। यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है। ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं। इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है।

अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के चलते युद्धपोत का चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है। इन युद्धक क्षमताओं के साथ साथ तारागिरी मानवीय संकटों के समय आपदा राहत में भी बड़ी मदद कर सकता है। इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर चीज के लिए आदर्श बनाती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह युद्धपोत एक बेहद शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है। तारागिरी युद्धपोत 6,670 टन का है और इसमें स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है।

मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। गौरतलब है कि सोमवार 30 मार्च को ही भारतीय नौसेना में युद्धपोत, दूनागिरी शामिल किया गया है। यह एक बहुमुखी बहु-मिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।

दूनागिरी, पूर्व में भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा रहे लिएंडर श्रेणी के फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी का नवीनतम स्वरूप है। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टील्थ, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में अभूतपूर्व प्रगति का प्रतीक है। अन्य कई युद्धपोतों की तुलना में इसमें उन्नत हथियार और सेंसर लगे हैं। ये युद्धपोत संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्रों से लैस हैं। साथ ही इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं। दूनागिरी पिछले 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपे जाने वाला पांचवां पी17ए युद्धपोत है।

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