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भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक, 100 से अधिक देशों को निर्यात

India's defence production exceeds US$20 billion, exports to over 100 countries

23 अप्रैल । भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही आज भारत से 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के रक्षा उत्पाद निर्यात किए जा रहा हैं। भारत ने मिस्र में आयोजित एक बैठक में यह जानकारी दी। यहां भारत और मिस्र दोनों देशों ने रक्षा उद्योग में संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन के अवसरों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।

दरअसल भारत और मिस्र के बीच 11वीं, संयुक्त रक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई है। यह बैठक रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह बैठक मिस्र के काहिरा शहर में आयोजित की गई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने किया। उनके साथ रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

वहीं, मिस्र की ओर से रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की। साथ ही दोनों देशों ने भविष्य के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया। वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर भी सहमति बनी। इसमें संरचित सैन्य सहयोग तंत्र को मजबूत करना, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को विस्तार देना और सैन्य अभ्यासों के स्तर व जटिलता को बढ़ाना शामिल है।

इसके साथ ही रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर भी विशेष फोकस किया गया है। यहां काहिरा में भारतीय पक्ष ने देश की तेजी से बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता पर प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है और देश 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग में संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन के अवसरों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह क्षेत्र अब दोनों देशों के रक्षा संबंधों का एक अहम आधार बनता जा रहा है।

बैठक के दौरान पहली बार नौसेना स्तर की स्टाफ वार्ता भी आयोजित की गई। इसमें हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने में भारतीय नौसेना की भूमिका पर चर्चा हुई। साथ ही, क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में सूचना साझा करने की व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अमर अब्देल रहमान से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग की प्रशंसा की गई।

इस अवसर पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर गया। यहां प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत और मिस्र के रक्षा संबंधों में एक अहम पड़ाव सितंबर 2022 में किए गए रक्षा सहयोग से जुड़े समझौते हैं। इसके बाद 2023 में दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। अब काहिरा में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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