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बॉन्डी आतंकी हमले की जांच में ऑस्ट्रेलियाई बंदूक कानूनों के लिए एक समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग तेज

Inquiry into Bondi terror attack fuels calls for a uniform approach to Australian gun laws

 

कैनबरा, सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुए घातक आतंकी हमले के बाद गठित एक महत्वपूर्ण यननहूदी-विरोधी जांच ने ऑस्ट्रेलिया में सभी स्तरों की सरकारों से बंदूक कानूनों पर एक समान राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है।

गुरुवार को जारी अंतरिम रिपोर्ट में यहूदी-विरोध और सामाजिक एकता पर गठित रायल कमीशन ऑन एंटीसेमीटिज्म एंड सोशल कोहेसन ने 14 सिफारिशें कीं, जिनमें से पाँच को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संघीय, राज्य और क्षेत्रीय सरकारों को एक समान हथियार कानून लागू करने और अवैध व अतिरिक्त हथियारों को समाज से हटाने के लिए गन बायबैक योजना को प्राथमिकता देनी चाहिए।

यह जांच एंथोनी अल्बानीज द्वारा जनवरी में गठित की गई थी, जब 14 दिसंबर 2025 को बॉन्डी बीच पर हनुक्का कार्यक्रम को निशाना बनाकर हुई सामूहिक गोलीबारी में 15 लोगों की मौत हो गई थी।

आयुक्त वर्जीनिया बेल द्वारा प्रस्तुत अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री, राज्य और क्षेत्रीय नेता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य हर संघीय चुनाव के नौ महीनों के भीतर आतंकवाद-रोधी अभ्यासों में भाग लें और आतंकवाद-रोधी पुलिस व्यवस्था की समीक्षा कराई जाए।

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि न्यू साउथ वेल्स राज्य की पुलिस को यहूदी त्योहारों और कार्यक्रमों में सुरक्षा बढ़ानी चाहिए।

अल्बानीज ने संवाददाताओं से कहा कि संघीय सरकार से संबंधित सभी सिफारिशों को अपनाया और लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ इस दस्तावेज़ को पढ़कर नहीं बैठेंगे, बल्कि इस पर कार्रवाई करेंगे।”

हमले के बाद, अल्बानीज़ ने हथियार स्वामित्व में सुधार का वादा किया, जिसके तहत एक व्यक्ति द्वारा कानूनी रूप से रखे जा सकने वाले हथियारों की संख्या सीमित की जाएगी और अनुमत हथियारों के प्रकार पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

उन्होंने राष्ट्रीय गन बायबैक योजना की भी घोषणा की, जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अतिरिक्त और नए प्रतिबंधित हथियार जमा कर सकते हैं, और राज्यों व क्षेत्रों से मार्च तक इन सुधारों पर सहमति बनाने का आग्रह किया।

मार्च के अंत तक, आठ में से केवल चार राज्यों और क्षेत्रों ने इस योजना में भाग लेने पर सहमति दी थी।

आरोपी हमलावर नवीद अकरम पर हत्या और आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह हमला इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित था। उनके पिता और सह-आरोपी साजिद अकरम को घटनास्थल पर ही गोली मार दी गई।

रॉयल कमीशन इस हमले के पीछे की मंशा और उद्देश्य की जांच नहीं करेगा ताकि आपराधिक कार्यवाही प्रभावित न हो। यह आयोग हमले की पहली बरसी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा।

 

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