N1Live National असली टीएमसी को पहचानना मुश्किल, जनता ने असली दोषियों को पहचान लिया: पूर्णिमा चक्रवर्ती
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असली टीएमसी को पहचानना मुश्किल, जनता ने असली दोषियों को पहचान लिया: पूर्णिमा चक्रवर्ती

It is difficult to identify the real TMC, but the public has identified the real culprits: Purnima Chakraborty.

श्यामपुकुर की निवर्तमान विधायक और मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहरे गुटबाजी का आरोप लगाते हुए दावा किया कि जनता ने ‘असली दोषियों’ की पहचान कर ली है। उन्होंने सीएम सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी पहल से कोलकाता की विरासत ट्राम सेवा को पुनर्स्थापित किया जा सकेगा।

मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “टीएमसी के अंदर कितने तृणमूल हैं, तृणमूल भी यह नहीं समझ पा रही है। लोग एक-दूसरे को चोर कह रहे हैं। अभी हालात ऐसे हैं कि आगे भी तृणमूल, पीछे भी तृणमूल और ऊपर भी तृणमूल है, असल में तृणमूल में कौन है, यह कोई नहीं समझ पा रहा है। आम लोग समझ रहे हैं कि चोर कौन है और कहां है। आपको सही समय का इंतजार करना चाहिए, इसमें शामिल सभी लोगों का पर्दाफाश होगा और यह पक्का होगा कि उन्हें उनके कामों की सजा मिले।”

कोलकाता में ट्राम बंद होने पर मंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यकाल को अभी डेढ़ महीने हुए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बहुत सारे कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया है। इसके पहले भी इतनी तेज गति से काम नहीं हुआ था। कोलकाता के इतिहास, गौरव, संस्कृति की सुरक्षा होगी। पश्चिम में जनता की सरकार है। जनता जो चाहेगी, वह कार्य पूरे होंगे।

इसके पहले पूर्णिमा चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर चर्चा का प्रस्ताव रखे जाने पर कहा था, “लंबे समय से देश में ‘एक देश, एक संविधान, एक विधान और एक निशान’ की अवधारणा को लेकर चर्चा होती रही है, और अब यह सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का सपना नहीं था, बल्कि देश के बहुत से लोगों की इच्छा रही है कि पूरे देश में एक समान व्यवस्था हो। अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण आम जनता को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब एक समान व्यवस्था की ओर बढ़ना देश के लिए सकारात्मक कदम है, और इससे आम लोगों को भी लाभ मिलेगा। यूसीसी को लेकर देश के आम नागरिकों में उत्साह है, और लोग इसे समान अधिकारों और एकरूपता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रहे हैं।”

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