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हिंदी-बंगाली सिनेमा और रंगमंच के दिग्गज उत्पल दत्त की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने किया याद

Jackie Shroff remembers the legendary Hindi-Bengali cinema and theatre personality Utpal Dutt on his death anniversary.

हिंदी और बंगाली सिनेमा से लेकर रंगमंच पर अपनी कला की अनूठी छाप छोड़ने वाले अभिनेता, निर्देशक और नाटककार उत्पल दत्त की पुण्यतिथि बुधवार को है। इस अवसर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर निर्देशक की तस्वीर पोस्ट की। इसके साथ उन्होंने लिखा, “उत्पल दत्त की पुण्यतिथि पर हम सभी उनको याद करते हैं। (29 मार्च 1929-19 अगस्त 1993) ।” अभिनेता उत्पल दत्त अपनी गंभीर और बेहतरीन कॉमेडी भूमिकाओं के अलावा क्रांतिकारी व राजनीतिक नाटकों के लिए भी जाने जाते थे। उत्पल दत्त का संबंध बांग्लादेश भी है। दरअसल, अभिनेता का जन्म 1929 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसिडेंसी (अब बांग्लादेश) के बारीसाल में हुआ था।

उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया। कॉलेज के दिनों से ही उनका जुड़ाव अंग्रेजी और बंगाली थिएटर से हो गया था, जिस वजह से वह कॉलेज खत्म करने के बाद रंगमंच में शामिल हो गए और खुद की थिएटर मंडली शुरू की। यह मंडली ज्यादातर पश्चिम बंगाल में प्रोफेशनल शो करने लगी और 1949 में इसका नाम ‘लिटिल थिएटर ग्रुप’ रख दिया गया। शुरुआत में यह ग्रुप अंग्रेजी में नाटक करता था, खासकर पढ़े-लिखे शहरी लोगों के लिए।

बाद में ज्यादा से ज्यादा आम लोगों और मेहनतकश वर्ग तक पहुंचने के लिए ग्रुप ने सिर्फ बंगाली में नाटक करना शुरू कर दिया।दत्त इस ग्रुप में नाटकों का निर्देशन भी करते थे और खुद भी एक्टिंग करते थे। उन्होंने शेक्सपियर, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, मैक्सिम गोर्की और हेनरिक इब्सन जैसे बड़े लेखकों के नाटकों के साथ-साथ रवींद्रनाथ टैगोर और माइकल मधुसूदन दत्त जैसे बंगाली लेखकों के नाटकों को भी मंच पर पेश किया।

उनके नाटक अक्सर राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते थे, जिस वजह से उन्हें 1965 में कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा था। थिएटर में आजीवन योगदान के लिए 1990 में अकादमी फैलोशिप से सम्मानित किए गए। उत्पल दत्त ने फिल्म ‘भुवन शोम’ (1969) में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था। हालांकि, उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म गोलमाल (1979) में ‘भवानी शंकर’ के सख्त और मजाकिया किरदार के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

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