February 11, 2026
National

मुख्यमंत्री सुक्खू को जयराम ठाकुर की नसीहत, कहा- झूठ बोलकर जनता को गुमराह करना बंद करें

Jai Ram Thakur’s advice to Chief Minister Sukhu, said- stop misleading the public by telling lies.

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में बजट पेश किया है और इस बजट में सबसे बड़ा चर्चा का मुद्दा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बन गया है।

ठाकुर ने स्पष्ट किया कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट केवल हिमाचल के लिए बंद नहीं हुई है। यह देश के सभी राज्यों पर लागू है। इसलिए बार-बार यह कहना कि हिमाचल के साथ अन्याय हुआ, सही नहीं है। बजट एक केंद्रीय बजट है और यह पूरे देश के लिए बनता है, किसी एक राज्य के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात समझनी चाहिए कि हिमाचल अकेला नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद करने का फैसला वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार लिया गया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को दूसरों से राय लेना और चर्चा करना पसंद नहीं है। मुख्यमंत्री इस मामले में जिस तरह से पेश आए हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि उन्हें खुद स्थिति का सही अंदाजा नहीं है। उनका कहना है कि हिमाचल में सरकार का संचालन संतुलित नहीं दिख रहा और मुख्यमंत्री का बोलने का तरीका, भाषा और रवैया वाकई हैरानी भरा है।

ठाकुर ने पिछले अनुभव को बताते हुए कहा कि सोलवें वित्त आयोग के दौरान रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद करने की घोषणा हुई, लेकिन इसकी तैयारी सालों से हो रही थी। उन्होंने याद दिलाया कि बार-बार वित्त आयोग यह कहता रहा कि राज्य इसे अपने अधिकार के रूप में नहीं ले सकते। ये केंद्र की मदद है, लेकिन इसे “आप ले सकते हैं” की तरह लेना सही नहीं है। हिमाचल में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही और वित्तीय अनुशासन बिगड़ा है। हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।

ठाकुर ने बताया कि 13वें वित्त आयोग (2010-2015) में हिमाचल को 7800 करोड़ मिले थे। लेकिन 14वें वित्त आयोग में, जब पीएम नरेंद्र मोदी सत्ता में आए, हिमाचल को 40,000 करोड़ का रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट मिला। इसके बावजूद, वर्तमान सरकार इसे सही ढंग से लागू नहीं कर रही और जनता के सामने स्पष्ट नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग (2020-2025) में भी हिमाचल को मिलने वाला फंड मुश्किल से मिला और इसे धीरे-धीरे कम करने का फैसला किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड के समय दुनिया, देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई थी, इसलिए फंड की जरूरत थी।

ठाकुर ने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पूरे देश में सबसे ज्यादा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट हासिल किया, क्योंकि पूर्व सरकार ने अपने पक्ष को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपना पक्ष सही तरीके से पेश नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसी सरकारों ने वित्तीय आयोग में अपने राज्यों का पक्ष क्यों रखा, लेकिन हिमाचल में ऐसा क्यों नहीं हुआ।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि उनके वित्त सचिव ने प्रस्ताव रखा कि बिजली, पानी और राशन जैसी सब्सिडी बंद करनी पड़ेगी। नई नौकरियों पर रोक लगेगी और विकास कार्य ठप रहेंगे। इसके बावजूद भी हिमाचल के लिए लगभग 7000 करोड़ के फंड कमी रह जाएगी। ठाकुर ने कहा कि ऐसी गंभीर स्थिति में सरकार को जनता को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बार-बार गुमराह करने वाले बयान देते हैं और समस्या का जिम्मा सिर्फ केंद्र या पूर्व सरकार पर डालते हैं।

ठाकुर ने अपने कार्यकाल के उदाहरण देते हुए कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का पूरा पैसा जनता के हित में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने गृहिणी सुविधा योजना, सहारा योजना, हिम केयर, मुख्यमंत्री स्वाभिमान योजना, शगुन योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के जरिए प्रदेश का विकास सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में प्रदेश में सड़क निर्माण, हर घर शुद्ध जल की सुविधा और अन्य विकास कार्य उच्च स्तर पर हुए। वर्तमान सरकार ने जनता को योजनाओं और फंड के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी नहीं दी। बुजुर्ग, कर्मचारी और ग्रामीण जनता चिंता में हैं कि उनकी पेंशन, वेतन और मूलभूत सुविधाएं सुरक्षित होंगी या नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि वे झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने की बजाय तथ्य और सच्चाई सामने रखें।

ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के लोग जानना चाहते हैं कि प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के लिए क्या फार्मूला है और संकट की घड़ी में इसे लागू कब किया जाएगा। जब वित्त सचिव कहते हैं कि सब्सिडी बंद करनी पड़ेगी, नई नौकरियों पर रोक लगेगी, विकास कार्य ठप रहेंगे और वित्तीय जिम्मेदारी यूपीएस की तरफ शिफ्ट करनी होगी, तो इसका सामना हिमाचल की जनता कैसे करेगी? मुख्यमंत्री बहुमत में होने के बावजूद भी हिमाचल की अर्थव्यवस्था संभाल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि उनके मंत्री और साथी नाराज हैं।

ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार के समय रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का पैसा जनहित की योजनाओं पर लगा। हर घर नल और शुद्ध जल, सड़क निर्माण, सहारा योजना, हिम केयर जैसी योजनाओं के जरिए हिमाचल का विकास हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक निधि और अन्य फंड को वर्तमान सरकार ने रोक रखा है। सीएम झूठ और भ्रम फैलाने के बजाय जनता के सामने वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करें। हिमाचल की जनता वर्तमान आर्थिक संकट में सच जानना चाहती है। बुजुर्ग पूछ रहे हैं कि पेंशन मिलेगी, कर्मचारी अपनी तनख्वाह को लेकर चिंतित हैं और ग्रामीणों को सड़क और पानी जैसी सुविधाएं चाहिए। झूठ बोलकर या दूसरों पर दोष डालकर किसी भी तरह का बचाव करना स्वीकार्य नहीं है।

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