April 3, 2026
National

जेल में बंद शीर्ष माओवादी नेता प्रशांत बोस का निधन, इलाज के दौरान दम तोड़ा

Jailed top Maoist leader Prashant Bose dies during treatment

3 अप्रैल । प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को रांची के रिम्स अस्पताल में निधन हो गया। सरायकेला जेल में बंद 75 वर्षीय प्रशांत बोस की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

जेल प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे प्रशांत बोस को सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी। आनन-फानन में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि कर दी। जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी है।

प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। वे संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के अहम सदस्य होने के साथ-साथ ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ के सचिव भी थे। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले प्रशांत बोस को नक्सली गलियारों में ‘मनीष’ और ‘बूढ़ा’ के नाम से भी जाना जाता था।

प्रशांत बोस नक्सली संगठन के शीर्ष नेताओं में शुमार थे और उन्हें संगठन के महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वह भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के महत्वपूर्ण सदस्य रहे थे। संगठन के भीतर वह ‘किशन दा’ के नाम से जाने जाते थे और रणनीतिक फैसलों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास उन्हें उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड रहा था।

करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे प्रशांत बोस को संगठन का ‘थिंक टैंक’ माना जाता था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक बताई जाती है। लंबे समय से जेल में बंद रहने और बढ़ती उम्र के कारण वे विभिन्न शारीरिक बीमारियों से ग्रस्त थे। उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है। फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

Leave feedback about this

  • Service