जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरोप लगाया कि ‘मजार-ए-शुहादा’ जाने से रोकने के लिए सोमवार को बारामूला जिले के कई वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नेताओं को नजरबंद करने पर इसकी आलोचना भी की। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उरी के विधायक सज्जाद शफी, बारामूला के विधायक जावेद हसन बेग, सोपोर के विधायक इरशाद रसूल कर, गुलमर्ग के विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह, पट्टन के विधायक जावेद रियाद बेदार, पार्टी के बारामूला अध्यक्ष शाहिद अली शाह और महिला विंग की जिला अध्यक्ष नीलोफर मसूद को पुलिस ने नजरबंद किया है।
पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इन नेताओं को 13 जुलाई को ‘मजार-ए-शुहादा’ पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि देनी थी, लेकिन पाबंदियों की वजह से वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। नेताओं ने इस कदम को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक और राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कोशिश बताया है। वहीं, सोमवार को श्रीनगर में सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है। लाल चौक समेत कई अहम जगहों पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। ऐसी आशंका है कि क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में स्थित शहीद कब्रिस्तान जा सकते हैं।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जबकि कब्रिस्तान के आसपास लोगों की आवाजाही पर रोक है और वहां कड़ी निगरानी रखी जा रही है इससे पहले, रविवार को पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने नजरबंद किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “शहीद दिवस से ठीक पहले हमें नजरबंद कर दिया गया है। इसकी वजह सिर्फ जम्मू-कश्मीर पुलिस ही बेहतर जानती है। क्या यही वह ‘सामान्य स्थिति’ है, जिसके कश्मीर में बहाल होने का दावा किया जाता है?”
उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। इल्तिजा ने लिखा, “इसमें कोई शक नहीं कि स्थानीय सरकार भी पुलिस के साथ मिलकर सिधरा में घर तोड़ने और अपनी सुविधानुसार विरोधियों को हिरासत में लेने का काम कर रही है।”

