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झारखंड हाईकोर्ट ने लापता किशोरी मामले में सीबीआई को बनाया पक्षकार, सीआईडी के साथ जांच के दिए निर्देश

Jharkhand High Court made CBI a party in the case of missing girl, directed to investigate with CID

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से छह साल से लापता नाबालिग लड़की के मामले में सीबीआई को पक्षकार (प्रतिवादी) बनाते हुए उसे जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई और राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को आपसी समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाने को कहा। साथ ही सीबीआई को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों के माध्यम से सीआईडी की जांच में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि लापता किशोरी का जल्द पता लगाया जा सके।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने किशोरी की मां उषा झा की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव को सूचित करते हुए सीबीआई को औपचारिक रूप से मामले में पक्षकार बनाया। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि ई-केवाईसी मिलान के क्रम में बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा बोकारो से लापता किशोरी से करीब 90 प्रतिशत तक मेल खाता पाया गया है। हालांकि, अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल नहीं खाने के कारण उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस पर अदालत ने वैज्ञानिक तकनीक के अधिक प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए पुणे के एक मामले का उल्लेख किया और जांच में जीएआईटी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का निर्देश दिया।

खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि सीआईडी को जांच सौंपे जाने के बावजूद अब तक की जांच काफी हद तक राज्य पुलिस के पहले किए गए अनुसंधान तक ही सीमित रही है। ऐसे में किशोरी की तलाश में केंद्रीय एजेंसी की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग आवश्यक प्रतीत होता है। यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है। 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण का मामला माना गया था। घटनास्थल के पास किशोरी की साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं।

लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। फिलहाल मामले की जांच सीआईडी कर रही है। गुरुवार की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय उपस्थित हुए जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की और रितु नंदा ने पक्ष रखा। अदालत में सीआईडी के एडीजी समेत विशेष जांच दल (एसआईटी) के अधिकारी भी मौजूद थे।

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