June 9, 2026
Entertainment

कंगना रनौत ने की युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की तारीफ, कहा- ‘देश के लिए वर्ल्ड कप लेकर आओ’

Kangana Ranaut praised young cricketer Vaibhav Suryavanshi, saying, “Bring the World Cup for the country.”

भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल की उम्र में इतिहास रचते हुए भारतीय टी20 टीम में जगह बनाई। उनकी इस उपलब्धि पर बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू के दौरान एक मशहूर गजल के जरिए वैभव सूर्यवंशी को बधाई दी।

आईएएनएस को बधाई देते हुए कंगना रनौत ने कहा, ”इतनी छोटी उम्र में टीम इंडिया में चयन होना बेहद गर्व की बात है। मुझे उम्मीद है कि वैभव आगे चलकर सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ियों से भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे और वर्ल्ड कप घर लाएंगे।” इसी बातचीत के दौरान कंगना ने एक मशहूर गजल की पंक्तियां भी सुनाईं– ‘ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन…जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन… नई रीत चलाकर तुम, ये रीत अमर कर दो।’

जब आईएएनएस ने कंगना से पूछा कि क्या उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को खेलते हुए देखना है, तो उन्होंने कहा, ”काम की व्यस्तता के चलते मुझे क्रिकेट देखने का ज्यादा समय नहीं मिल पाता। मैं हर उभरते हुए युवा खिलाड़ी को शुभकामनाएं देती हूं और चाहती हूं कि वे देश का नाम रोशन करें। मेरा मकसद किसी पर दबाव डालना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को प्रेरित करना है ताकि वे अपने खेल में और बेहतर कर सकें।”

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर से भी कम उम्र में भारतीय टीम में जगह बनाई है। सचिन को 16 साल की उम्र में टीम इंडिया में मौका मिला था, जबकि वैभव को 15 साल की उम्र में यह अवसर मिला है। इसी वजह से उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कहा जा रहा है।

इसके अलावा, कंगना रनौत ने खुलासा किया कि आखिर उन्होंने अपनी सोशल मीडिया टीम से अपने अकाउंट्स की कमान वापस क्यों ले ली और क्यों वह खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संभालना पसंद करती हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए कंगना रनौत ने कहा, ”मुझे सोशल मीडिया पर लोगों से सीधे बात करना ज्यादा पसंद है। एक समय मेरा सोशल मीडिया अकाउंट मेरी टीम संभाल रही थी, लेकिन टीम द्वारा लिखे जाने वाले पोस्ट और कैप्शन मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आते थे। वे इतने औपचारिकता से भरे होते थे कि ऐसा लगता था जैसे कोई व्यक्ति केवल जीवित रहने के लिए माफी मांग रहा हो। एक दिन मैंने अपनी टीम से पूछा कि आखिर ये किस तरह की भाषा लिखी जा रही है। हर बात को जरूरत से ज्यादा सफाई देने वाले अंदाज में पेश करना सही नहीं है। इसी वजह से मैंने सोशल मीडिया की कमान फिर से अपने हाथ में लेने का फैसला किया।”

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