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केरलः चुनावी हार, ईडी जांच और साख के संकट से जूझ रही सीपीआई (एम), रणनीति में बदलाव पर कर रही विचार

Kerala: Struggling with electoral defeat, ED investigations and a credibility crisis, the CPI(M) is considering a change in strategy.

केरल में चुनावी हार के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) अपनी पार्टी में बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है। एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद राज्य के नेताओं ने माना है कि पार्टी को अपनी रणनीति में सुधार करने की जरूरत है।

ये बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब पार्टी को एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक आलोचना, प्रशासनिक जांच और वरिष्ठ नेताओं व नेतृत्व के करीबी सहयोगियों से जुड़े कानूनी दबाव हैं। पार्टी के भीतर हो रहे इस बदलाव का मुख्य मकसद राजनीतिक नैरेटिव और शासन की विश्वसनीयता को फिर से बनाना है।

खबर है कि राज्य के पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल और उनसे पहले इस पद पर रहे टी.एम. थॉमस इसाक ने एक वैकल्पिक ‘श्वेत पत्र’ पर काम शुरू कर दिया है। इसका मकसद वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली नई सरकार द्वारा जारी किए गए आकलन का जवाब देना है। सरकार के दस्तावेज में पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल के दौरान वित्तीय प्रबंधन और कामकाज पर सवाल उठाए गए थे, जिसके जवाब में सीपीआई (एम) ने अपना पक्ष रखने का फैसला किया, हालांकि पार्टी की चुनौतियां सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव तक ही सीमित नहीं हैं।

वहीं, ईडी ने ‘एक्सलॉजिक-सीएमआरएल’ मामले से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीना विजयन को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उन्हें शुक्रवार को कोच्चि में ईडी अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।

यह मामला वीना विजयन की आईटी फर्म, एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़े वित्तीय लेन-देन के आरोपों से संबंधित है, जिसके अब बंद होने की खबर है। इस घटना का राजनीतिक प्रभाव काफी गहरा रहा है। राज्य के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुईं, जिसके चलते सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं और जांच को लेकर तनाव का माहौल और भी बढ़ गया।

पार्टी का कहना है कि उसे राजनीतिक रूप से प्रेरित निशाना बनाया जा रहा है, जबकि ईडी अपनी प्रक्रियात्मक जांच जारी रखे हुए है। सीपीआई (एम) के लिए वर्तमान समय चुनावी निराशा, प्रशासनिक जांच और प्रतिष्ठा संबंधी चुनौतियों का संगम है। आंतरिक रूप से नेताओं ने संगठनात्मक कठोरता से लेकर मतदाताओं की भागीदारी में कमी तक के मुद्दों को उठाया है। साथ ही प्रमुख सामाजिक समर्थन आधारों में गिरावट को भी स्वीकार किया है।

पिनाराई विजयन के लिए दबाव विशेष रूप से तीव्र प्रतीत होता है, क्योंकि नेतृत्व को करीबी परिवार के सदस्यों से जुड़े राजनीतिक आलोचना और कानूनी घटनाक्रमों दोनों का सामना करना पड़ रहा है। ईडी द्वारा वीना विजयन को भेजा गया समन एक संवेदनशील राजनीतिक मोड़ पर जांच का एक और स्तर जोड़ देता है।

आगामी हफ्तों में राज्य समिति की विस्तारित बैठक होने की संभावना को देखते हुए पार्टी अब रणनीतिक नवीनीकरण के साथ-साथ नुकसान की भरपाई करने का प्रयास कर रही है।

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