बांग्लादेश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 30 दिसंबर 2025 की सुबह निधन हो गया। बेगम खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने के लिए भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी वहां पहुंचे थे। एस. जयशंकर ने जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश सौंपा था। खत में पीएम मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर शोक जताया और कहा कि उनके जाने से जो खालीपन है, उसे भरा नहीं जा सकता।
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बेगम खालिदा जिया के जाने से एक ऐसा खालीपन आया है जिसे भरा नहीं जा सकता, लेकिन उनका विजन और विरासत हमेशा रहेगी।
चिट्ठी में लिखा है, “मुझे यकीन है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के आपके काबिल नेतृत्व में उनके आदर्शों को आगे बढ़ाया जाएगा और एक नई शुरुआत और भारत और बांग्लादेश के बीच गहरी और ऐतिहासिक साझेदारी को और बेहतर बनाने के लिए एक गाइडिंग लाइट की तरह काम करेंगे।”
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं बांग्लादेश के लोगों के साथ भी हैं, जिन्होंने अपने पूरे इतिहास में जबरदस्त ताकत और सम्मान दिखाया है। उन्होंने लिखा, “मुझे भरोसा है कि वे शांति और सद्भाव के साथ आगे बढ़ते हुए अपने साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और राष्ट्रीय एकता की गहरी भावना से आगे बढ़ते रहेंगे।”
पीएम मोदी ने खालिदा जिया के साथ 2015 में अपनी मुलाकात को याद किया और कहा, “वह एक अनोखे इरादे और विश्वास वाली नेता थीं और उन्हें बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त था।” पीएम मोदी ने कहा कि बांग्लादेश के विकास में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई। खालिदा जिया ने बांग्लादेश के विकास के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में कई अहम योगदान दिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस गहरे निजी नुकसान पर मेरी दिल से संवेदनाएं स्वीकार करें। उनकी आत्मा को शांति मिले।” उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि वे तारिक रहमान और उनके परिवार को इस मुश्किल समय से उबरने की ताकत और हिम्मत दें। उन्होंने कहा, “मैं आपके भविष्य के प्रयासों के लिए भी आपको शुभकामनाएं देता हूं।”
31 दिसंबर को उन्हें उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बेगम जिया को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। जिया के जाने के साथ ही बांग्लादेश में राजनीतिक युग का अंत हो गया।

