तृणमूल कांग्रेस के नेता माजिद मेमन ने कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद केंद्र की भाजपा सरकार पर एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आज केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र नहीं हैं और इन संस्थाओं के प्रमुखों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में माजिद मेमन ने कहा, “चुनावों के दौरान केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल बार-बार देखा गया है, जिसमें चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी संस्थाएं अक्सर सरकार के पक्ष में झुकी हुई दिखती हैं। इन संस्थाओं को संविधान के तहत पूरी तरह से स्वतंत्र रहने की ताकत दी गई है। लेकिन वे स्वतंत्र नहीं हैं और इनके संस्थाओं के प्रमुखों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।”
टीएमसी नेता ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को ‘भाजपा का मोहरा’ बताते हुए कहा, “मैं पूरे सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि राज्यपाल का पद बहुत गरिमापूर्ण और सम्मानजनक है। हालांकि, दुर्भाग्य से जिस तरह से भाजपा सरकार ने राज्यपालों की नियुक्ति की है, उससे पता चलता है कि ज्यादातर आरएसएस के सदस्य हैं और भाजपा से जुड़े हुए हैं। यह संवैधानिक ढांचे को कमजोर करता है, और किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में काम करने वाला राज्यपाल लोकतंत्र के हित में नहीं है।”
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। टीएमसी नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु तक भाजपा कमजोर होती जा रही है। इसलिए वह ऐसी मुहिम चला रही है, जिसमें उसको (भाजपा) वोट न करने वाले लोगों के नामों को खारिज किया जाए। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
इसी बीच, माजिद मेमन ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में आरोप तय किए जाने पर लालू प्रसाद यादव का बचाव करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद के खिलाफ सालों से कोर्ट में कार्रवाई चल रही है। जब भी सरकार को लगता है कि लालू प्रसाद खतरा बन सकते हैं या उनकी राजद फिर से मजबूत हो सकती है, तो उन्हें दबाने के लिए कोर्ट केस शुरू कर दिए जाते हैं।”
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध ढांचे को गिराने के फैसले का समर्थन करने पर माजिद मेमन ने कहा, “यह सलमान खुर्शीद का निजी विचार है। कोई भी अपनी राय दे सकता है और उन्होंने अपना नजरिया बताया है। कांग्रेस इस बयान का समर्थन करती है या नहीं, यह देखना बाकी है।”
उन्होंने कहा कि कानून के तहत की गई कोई भी कार्रवाई हमेशा स्वागत योग्य है, लेकिन अगर किसी कार्रवाई से अशांति, झड़पें होती हैं या कानूनी सिस्टम कमजोर होता है, तो उसे रोका जाना चाहिए।

