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मधु बंगारप्पा के ‘मौन राष्ट्रपति’ वाले बयान की कुमारस्वामी ने की निंदा, माफी की मांग की

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ‘मौन राष्ट्रपति’ कहने की अपमानजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा की और उनसे तत्काल माफी मांगने की मांग की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर जारी बयान में कुमारस्वामी ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के प्रति यह अपमानजनक टिप्पणी अत्यंत निंदनीय है। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन आदिवासी समुदाय की महिला राष्ट्रपति मुर्मु का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘मौन राष्ट्रपति’ वाली टिप्पणी कांग्रेस पार्टी की संविधान विरोधी और अहंकारी मानसिकता को दर्शाती है।

कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा,“कर्नाटक के ऐसे कांग्रेस नेताओं से और क्या उम्मीद की जा सकती है जो गांधी परिवार की गुलामी में लिप्त हैं?” उन्होंने मधु बंगारप्पा पर टिप्पणी के माध्यम से संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना करने का आरोप लगाया और मांग की कि राज्य के शिक्षा मंत्री राष्ट्रपति से तुरंत माफी मांगें।

मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोपों और राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने सहित चल रहे राजनीतिक विवादों को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की कांग्रेस नेतृत्व की योजनाओं के बारे में मीडिया से बात करते हुए मधु बंगारप्पा ने शुक्रवार को कहा था कि सभी जानते हैं कि यह एक “मौन राष्ट्रपति” हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के अत्यधिक प्रभाव या दबाव में हैं। उन्होंने ज्ञापन प्रस्तुत करने के परिणामों पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री संभवतः राष्ट्रपति को आवेदन स्वीकार करने का निर्देश देकर बिना किसी वास्तविक समाधान के उन्हें वापस भेज देंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि यही कारण है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बंगारप्पा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने की भाजपा की राजनीतिक रणनीति अप्रभावी हो गई है। भाजपा को यह एहसास हो गया है कि वह पीएम मोदी का चेहरा दिखाकर चुनाव नहीं जीत सकती। इसलिए, उसने मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी धोखाधड़ी का सहारा लिया है।

उन्होंने देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि मीडिया को इस मुद्दे पर गंभीरता से सवाल उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना और जनता के सामने सच्चाई लाना मीडिया का दायित्व है। भाजपा नेता मुख्य चुनाव आयुक्त को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

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