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एच-1बी वीजा फीस रद्द होने पर नेताओं ने किया स्वागत, बताया अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद

Leaders welcomed the cancellation of H-1B visa fees, saying it was beneficial for the economy.

 

वॉशिंगटन,डेमोक्रेटिक लॉमेकर्स, राज्य अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर शुल्क को रद्द करने वाले संघीय अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे नियोक्ताओं, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी जीत बताया।

भारतीय मूल के अमेरिकी लॉमेकर राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह फैसला एक ऐसी अवैध नीति को खारिज करता है, जिसने अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने और व्यवसायों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों के लिए जरूरी उच्च कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करना मुश्किल बना दिया था।

उन्होंने कहा, “एच-1बी वीजा कार्यक्रम नवाचार को बढ़ावा देता है, महत्वपूर्ण उद्योगों में अमेरिका की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है और कंपनियों को बढ़ने तथा अमेरिका में निवेश करने में मदद करके रोजगार सृजन का समर्थन करता है।”

कृष्णमूर्ति ने कहा कि नीति निर्माताओं को कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना चाहिए, लेकिन अत्यधिक कुशल पेशेवरों को अमेरिका आने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ऐसी मनमानी बाधाएं लगाने के बजाय, जो प्रतिभा और निवेश को दूसरे देशों की ओर धकेलती हैं, हमें दुरुपयोग रोकने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए कि अमेरिका दुनिया में नवाचार, कारोबार और आर्थिक विकास के लिए सबसे बेहतर स्थान बना रहे।”

इस नीति के खिलाफ कई राज्यों की ओर से मुकदमे का नेतृत्व करने वाले रॉब बांटा ने फैसले को नियोक्ताओं और सार्वजनिक संस्थानों पर डाले गए अवैध बोझ के खिलाफ बड़ी जीत बताया।

उन्होंने कहा, ”ट्रंप प्रशासन का अवैध और महंगा 1 लाख डॉलर टैक्स रद्द कर दिया गया है।”

बोंटा ने कहा कि यह शुल्क अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली उच्च कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने की क्षमता पर हमला था।

उन्होंने कहा कि इस शुल्क से शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों, शोधकर्ताओं और अन्य कुशल पेशेवरों की भर्ती करना अधिक कठिन और महंगा हो जाता, जिनकी जरूरत विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए है।

बोंटा ने कहा, “कैलिफोर्निया व्यवसायों और प्रतिभाओं के लिए खुला है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं को मजबूत और कुशल कार्यबल मिलता रहे।”

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज ने भी इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे रोजगार-आधारित इमिग्रेशन व्यवस्था में स्थिरता और निष्पक्षता लौटेगी।

एफआईआईडीएस के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा, “हम संघीय अदालत के उस फैसले का स्वागत करते हैं, जिसने 1 लाख डॉलर की एच-1बी वीजा फीस को रद्द कर दिया। इससे रोजगार-आधारित इमिग्रेशन प्रणाली में पूर्वानुमेयता और निष्पक्षता बहाल होगी।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता में अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

कंद ने कहा, “वैश्विक स्तर की उच्च कुशल प्रतिभाओं तक पहुंच अमेरिकी प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों की निरंतर वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि बड़े नीतिगत बदलाव कानून और आर्थिक वास्तविकताओं के आधार पर ही किए जाने चाहिए।

इस बीच, सैनफोर्ड बिशप ने भी फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के अस्पतालों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अतिरिक्त शुल्क से भर्ती प्रक्रिया और अधिक कठिन तथा महंगी हो जाएगी।

बिशप ने कहा, “नियोक्ताओं के एच-1बी आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस अमेरिका आने वाली सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का मनोबल टूट जाता और हमारी अर्थव्यवस्था के विकास तथा नवाचार को प्रभावित करती।”

यह फैसला तब आया जब अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने निष्कर्ष निकाला कि ट्रंप प्रशासन के पास यह शुल्क लगाने का अधिकार नहीं था और कांग्रेस ने एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाने की शक्ति कार्यपालिका को नहीं दी थी। इसके बाद अदालत ने इस नीति को पूरे देश में रद्द कर दिया।

एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को ऐसे विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनके पास स्पेशल स्किल हो और कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता हो। इस कार्यक्रम का व्यापक उपयोग प्रौद्योगिकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों और शोध संगठनों द्वारा किया जाता है, जहां विशेष प्रतिभाओं की कमी रहती है।

हर साल जारी होने वाले एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है। यही कारण है कि यह कार्यक्रम भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है।

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