19 मार्च । असम के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का उनका फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया था, बल्कि यह पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रहे असंतोष का नतीजा था।
आईएएनएस से बातचीत में बोरदोलोई ने कहा कि कई घटनाओं और पार्टी नेतृत्व से बढ़ती दूरी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि यह एक लंबी कहानी है। ऐसा नहीं है कि मैंने अचानक कोई जल्दबाजी में फैसला लिया हो। कई घटनाएं हुई और किसी तरह मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि पार्टी के दायरे में वह अपनापन या भाईचारा नहीं रहा। पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। मैं असल में कुछ मुद्दों पर चर्चा करना चाहता था, और फिर हालात तब और बिगड़ गए जब पीसीसी नेतृत्व ने भी नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। मैंने पाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच भरोसे की कमी है। ऐसे घुटन भरे माहौल में, मुझे लगा कि मैं कोई सार्थक भूमिका नहीं निभा सकता।
उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व की तरफ से जवाबदेही की कमी ने उनकी राजनीतिक निष्ठा बदलने के फैसले में अहम भूमिका निभाई।
अपने बेटे, प्रतीक बोरदोलोई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उसे मेरे पुराने विधानसभा क्षेत्र, मार्घेरिटा से टिकट दिया था। वह असम में मेरा गृह नगर है। लेकिन, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है क्योंकि मेरी उससे कोई बात नहीं हुई है। आजकल, वह मुझसे ज्यादा बात नहीं करता।
इस बीच, भाजपा ने प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है, जो असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव है।
इस सबके बीच, प्रतीक बोरदोलोई ने गुरुवार को मार्घेरिटा विधानसभा क्षेत्र से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उन्होंने अपने पिता के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के फैसले के बाद मौजूदा परिस्थितियों का हवाला दिया।
प्रतीक बोरदोलोई ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे एक पत्र में पूरी इज्जत और पार्टी के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ अपने फैसले से अवगत कराया।

