8 फरवरी । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को रायपुर में कहा कि देश में वामपंथी उग्रवाद का मुख्य कारण माओवादी विचारधारा है। इस विनाशकारी विचारधारा ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में रहने वाले आदिवासियों की तीन पीढ़ियों की जिंदगी खराब कर दी है।
गृह मंत्री ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने मासूम आदिवासियों को हथियार उठाने पर मजबूर किया और यह झूठी कहानी गढ़ी कि नक्सलवाद ‘विकास की कमी’ और ‘कानून-व्यवस्था की समस्याओं’ के कारण पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा, “मैं नक्सली गतिविधियों में शामिल लोगों से सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर करने की अपील करता हूं। मैं खासकर युवा आदिवासी महिलाओं से अपील करता हूं कि भाजपा सरकार के पास उनके भविष्य के लिए बेहतर योजनाएं हैं।”
गृह मंत्री शाह ने कहा, “मैं उन लोगों से पूरी तरह असहमत हूं, जो कहते हैं कि नक्सलवाद का कारण विकास और कानून-व्यवस्था है। नक्सलवाद की शुरुआत माओवादी विचारधारा पर आधारित एक साजिश थी, और मेरे पास इस बात को साबित करने के लिए सबूत हैं। अगर यह विकास की समस्या होती, तो उस समय कई जिलों की स्थिति बस्तर से भी ज्यादा खराब होती। अगर यह कानून-व्यवस्था की समस्या होती, तो कई जिलों में कानून-व्यवस्था की हालत और भी खराब होती।”
उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि माओवादी विचारधारा, जिसने पिछले चार दशकों में मासूम आदिवासी बच्चों के हाथों में बंदूकें देकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी, स्कूल तोड़ दिए और विकास में रुकावट डाली, ‘विनाश का रास्ता है।’
उन्होंने पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच मजबूत रिश्ते के बारे में भी बात की और कहा कि दोनों राज्य एक साथ तरक्की कर रहे हैं और भाइयों की तरह एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
बता दें कि जनवरी 2024 से, छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों में 500 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिनमें सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशवा राव उर्फ बसवराजू जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। इसी दौरान, राज्य में लगभग 1,900 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 2,500 से ज्यादा ने सरेंडर किया।
खास बात यह है कि मध्य प्रदेश, जो लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित था, उसे 31 मार्च, 2026 की डेडलाइन से काफी पहले ही नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है।


Leave feedback about this