January 6, 2026
National

‘जेएनयू में वामपंथी गुटों ने किया देशविरोधी कृत्य’, एबीवीपी ने कैंपस में लगे विवादित नारों के बाद कड़ी निंदा की

“Leftist groups in JNU committed anti-national acts,” ABVP strongly condemns controversial slogans raised on campus

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जेएनयू कैंपस में विवादित नारों को लेकर कड़ी निंदा की है। एबीवीपी ने राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जेएनयू परिसर में किसी भी कीमत पर हिंसा, घृणा और भारत-विरोधी एजेंडे को पनपने नहीं देना चाहिए।

एबीवीपी की दिल्ली इकाई ने एक बयान में कहा, “जेएनयू कैंपस में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर वही पुरानी देशविरोधी मानसिकता सामने आई, जो समय-समय पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को ठेस पहुंचाती रही है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रविरोधी और हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद कुछ वामपंथी और तथाकथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम उग्र नारेबाजी की।”

एबीवीपी ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं है, बल्कि 2016 से लेकर 2020 और उसके बाद तक जेएनयू में बार-बार सामने आती रही उसी विचारधारा की निरंतरता है, जिसने पहले भी आतंकवादियों के समर्थन, भारत की एकता-अखंडता पर हमले और संवैधानिक व्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास किया है।

बयान में कहा गया है, “अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली का यह स्पष्ट मत है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिया गया निर्णय भारत की स्वतंत्र, निष्पक्ष और सशक्त न्यायिक परंपरा का प्रमाण है। न्यायपालिका ने तथ्यों, साक्ष्यों और संविधान के दायरे में रहकर निर्णय दिया है, न कि किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा या सड़कों पर की जाने वाली नारेबाजी के आधार पर। इसके बावजूद जिस प्रकार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के वामपंथी नेतृत्व द्वारा इस निर्णय के विरोध में उग्र और हिंसक भाषा का प्रयोग किया गया, वह न सिर्फ न्यायालय की अवमानना की मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति की आड़ में अराजकता फैलाने का प्रयास भी है।”

एबीवीपी ने कहा कि जेएनयू में बार-बार वामपंथी और टुकड़े-टुकड़े गैंग की ओर से देश की एकता-अखंडता पर सवाल उठाने, आतंकवाद के आरोपियों का महिमामंडन करने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की जो परंपरा बनाई गई है, उसका अब स्पष्ट रूप से विरोध किया जाना जरूरी है। वहीं जेएनयू प्रशासन के इस लापरवाह रवैए पर भी सवाल उठता है।

एबीवीपी की दिल्ली इकाई के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों की ओर से की गई नारेबाजी पूरी तरह से देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी जिस प्रकार संवैधानिक पदों और राष्ट्रविरोधी भाषा का प्रयोग किया गया, वह अस्वीकार्य है। अभाविप जेएनयू इकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित अराजकता मानती है।

Leave feedback about this

  • Service