14 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईधन की खपत कम करने सहित अन्य अनावश्यक खर्चों पर बचत की अपील की और जिसका अब देशव्यापी असर भी देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से राज्य में सरकारी उत्सवों और भव्य आयोजनों पर रोक के साथ वित्तीय अनुशासन के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को सीएम मोहन यादव को पत्र में लिखा, ”इन दिनों आपकी सरकार और भाजपा जनता को वित्तीय अनुशासन, मितव्ययिता और सादगी का पाठ पढ़ा रही है। महंगाई, बेरोजगारी, बिजली-पानी के बढ़ते बिल, किसानों की बदहाली और युवाओं की टूटी उम्मीदों के बीच सरकार का संदेश यह है कि जनता खर्च कम करे, संयम बरते और परिस्थितियों से समझौता कर ले, लेकिन शुरुआत जनता की जेब से नहीं, बल्कि सत्ता के वैभव से होनी चाहिए।”
जीतू पटवारी ने सरकारी उत्सव और आयोजनों पर एक साल की रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहा है, बेरोजगार युवा निराश हैं, आदिवासी अंचलों में कुपोषण है, ऐसे समय करोड़ों रुपए के सरकारी उत्सव जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसे हैं। सरकार यदि संवेदनशील है, तो मंचों की चमक नहीं, जनता की तकलीफ देखे। सरकारी कार्यक्रम अब जनसेवा से ज्यादा राजनीतिक इवेंट मैनेजमेंट बन चुके हैं। बड़े-बड़े मंच, स्वागत द्वार, होर्डिंग्स, हेलीकॉप्टर और प्रचार तंत्र पर जनता का पैसा बहाया जा रहा है। क्या यह वही भाजपा है जो कभी ‘कम सरकार, ज्यादा शासन’ की बात करती थी?
राज्य में विधायक और मंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए जीतू पटवारी ने पत्र में आगे लिखा कि विधायकों, दर्जा प्राप्त मंत्रियों, राज्य और कैबिनेट स्तर के मंत्रियों के वेतन, भत्तों और पेंशन पर पुनर्विचार हो। जब सरकार जनता से त्याग मांग रही है, तब जनप्रतिनिधियों को भी उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। कम से कम एक वर्ष के लिए वेतन-भत्तों और अनावश्यक सुविधाओं में कटौती कर सरकार जनता के साथ खड़ी दिखाई दे सकती है।
सरकारी आयोजनों में कथित तौर पर भीड़ जुटाई जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि आज मध्य प्रदेश में प्रशासन जनता के काम से ज्यादा भीड़ जुटाने में व्यस्त दिखाई देता है। सरकारी मशीनरी का उपयोग राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए हो रहा है। यह लोकतंत्र नहीं, संसाधनों का दुरुपयोग है। यदि क्षेत्रीय स्तर पर भी जन-जमाव और शक्ति प्रदर्शन करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जाता है तो कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जब स्कूल ऑनलाइन चल सकते हैं। न्यायालय वर्चुअल सुनवाई कर सकते हैं, तो सरकारी प्रचार के लिए हजारों करोड़ की यात्राएं और रैलियां क्यों? मुख्यमंत्री और मंत्री डिजिटल संवाद करें, कर्जदार प्रदेश की कर्जदार जनता के खून-पसीने की कमाई से एकत्रित जन-धन बचाएं। इसके साथ ही विदेशी दौरों और बड़े-बड़े डेलिगेशन पर तत्काल रोक लगे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को मध्य प्रदेश में वास्तविक वित्तीय अनुशासन लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।

