तमिलनाडु के मदुरै जिले में मट्टू पोंगल के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध पालामेडु जल्लीकट्टू शुक्रवार सुबह से आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद शुरू हो गया है। इस अवसर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस वर्ष के आयोजन के लिए कुल 1,000 बैलों और 600 टेमर (बैल काबू करने वाले) ने पंजीकरण कराया है। पालामेडु में मंजमलाई नदी के किनारे स्थित अखाड़ा पूरी तरह तैयार है। वाडीवासल (प्रवेश द्वार), दर्शकों के लिए गैलरी, पुरस्कार मंच और दोहरी बैरिकेडिंग के साथ सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत 7 “टेम्पल बुल्स,” यानी गांव के सम्मानित बैलों, को छोड़ने से हुई। इसके बाद ऑनलाइन परमिट नंबर के क्रम में पंजीकृत बैल अखाड़े में उतरेंगे। बैल और टेमर, दोनों के लिए कड़ी मेडिकल जांच अनिवार्य की गई है। साउथ ज़ोन के आईजी विजयेंद्र बिदारी के नेतृत्व में 2,500 पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात हैं। पालामेडु महालिंगा स्वामी मदाथु कमेटी और टाउन पंचायत ने दर्शकों के लिए पीने के पानी और शौचालय की समुचित व्यवस्था की है।
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने निष्पक्ष और सुरक्षित मुकाबले के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बैलों के शरीर पर पाउडर या हल्दी लगाने पर उन्हें डिसक्वालीफाई किया जाएगा और मालिकों पर भविष्य में प्रतिबंध लग सकता है। इसके साथ ही नकली परमिट, यूनिफॉर्म बदलने या नियम उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई होगी। हर बैल के साथ केवल एक व्यक्ति को अनुमति है, और नशे की हालत में पाए जाने पर तत्काल बाहर किया जाएगा। इसलिए आयोजकों को निर्देश दिया गया है कि सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
यह आयोजन शाम 5:00 बजे तक चलेगा और कुल 11 राउंड होंगे। हर राउंड में रंग-बिरंगी यूनिफॉर्म पहने लगभग 50 टेमर हिस्सा लेंगे, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ फाइनल में पहुंचेंगे। सुरक्षा के लिए वाडीवासल के सामने 50 फीट क्षेत्र को नारियल के रेशे की मोटी परत से ढका गया है। करीब 2 किलोमीटर लंबी पट्टी वाले पालामेडु अखाड़े की खास बनावट इसे अनोखा बनाती है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड और पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में यह पारंपरिक खेल एक बार फिर जोश, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण पेश करेगा।


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