N1Live National महाराष्ट्र: खामगांव से शेगांव की ओर बढ़ी गजानन महाराज की पालकी, वारकरियों का उमड़ा सैलाब
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महाराष्ट्र: खामगांव से शेगांव की ओर बढ़ी गजानन महाराज की पालकी, वारकरियों का उमड़ा सैलाब

Maharashtra: Gajanan Maharaj's Palkhi moves from Khamgaon towards Shegaon; a massive sea of ​​Warkaris surges forth.

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में बुधवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। खामगांव में आखिरी पड़ाव पूरा करने के बाद संत गजानन महाराज की पवित्र पालकी शेगांव के लिए रवाना हुई। इस वापसी यात्रा में लाखों वारकरी पैदल शामिल हुए और पूरे मार्ग को “गण गण गणात बोते” के जयघोष से गूंजा दिया।

इस दौरान मंत्री आकाश फुंडकर ने पालकी पर फूल बरसाकर वारकरियों का स्वागत किया और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। भक्तों ने भजन गाए, ढोल-ताशे बजाए और किसानों की समृद्धि, अच्छी फसल और समाज की भलाई के लिए प्रार्थना की।

मुंबई से पहली बार इस वारी में आए एक श्रद्धालु ने बताया, “हम पत्नी और संभाजीनगर के दोस्तों के साथ आए हैं। यहां का माहौल ऐसा है कि बार-बार आने की इच्छा हो रही है। जगह-जगह पानी, चाय, शरबत और नाश्ते का इंतजाम किया गया है। लोगों का स्वभाव बहुत अच्छा है, मजा आ रहा है। पुलिस की व्यवस्था भी सही है। जगह-जगह ट्रैफिक रोककर यात्रियों के लिए सुविधा की गई है। बस यही प्रार्थना है कि लोगों में सद्भावना बना रहे और देश तरक्की करे।”

एक महिला शिक्षिका ने 20 साल से इस वारी में आने का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, “हम सब टीचर और हाउसवाइफ हैं। घर से बाहर निकलने का मौका कम मिलता है लेकिन जैसे ही गजानन महाराज की पालकी खामगांव से शेगांव निकलती है, हम सुबह 2 बजे उठकर सहेलियों को फोन करके तैयार हो जाती हैं। यहां आकर जो सुकून मिलता है वो पंढरपुर में विट्ठल-माऊली के दर्शन के बाद भी नहीं मिलता। सबसे खास बात ये है कि इतनी भीड़ के बावजूद यहां कहीं गंदगी नहीं दिखती। हर मौली अपना कचरा डस्टबिन में डालती है। गजानन मौली की कृपा की ये साक्षात मूर्ति है। जब तक हम चल सकेंगे, तब तक हर साल आएंगे।”

एक अन्य महिला भक्त ने कहा, “हम हर साल ये वारी करते हैं। ये हमें सालभर की थकान भूलने की शक्ति देती है। इसके बाद पूरा साल आनंद और खुशहाली से बीतता है। हम गजानन मौली से प्रार्थना करते हैं कि किसानों की फसल अच्छी हो, सबको स्वस्थ और आरोग्यपूर्ण जीवन मिले। हम हर साल आते हैं और भगवान से यही मांगते हैं कि हमें हर साल इस वारी में शामिल होने की शक्ति दें।”

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