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महाराष्ट्र : जीएमएलआर फ्लाईओवर में देरी, ठेकेदार पर बीएमसी का 50 लाख का अंतिम जुर्माना

Maharashtra: GMLR flyover delayed, BMC imposes final penalty of Rs 50 lakh on contractor

19 फरवरी । बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) परियोजना के तहत दिंडोशी कोर्ट और दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी के बीच बन रहे फ्लाईओवर के निर्माण में देरी के लिए ठेकेदार पर 50 लाख रुपए का अंतिम जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है।

अतिरिक्त नगर आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने बुधवार को साइट का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और पाया कि ठेकेदार निर्धारित समय-सारणी का पालन नहीं कर रहा है। जीएमएलआर परियोजना पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच यातायात जाम को कम करने और नागरिकों को त्वरित, सुगम व सुरक्षित यात्रा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।

यह परियोजना कुल चार चरणों में प्रस्तावित है, जिसमें चरण 3(ए) में 1.26 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोटरी का निर्माण शामिल है। फ्लाईओवर दिंडोशी कोर्ट से शुरू होकर रत्नागिरी जंक्शन होटल के पास 90 डिग्री कोण पर मुड़ता है और दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी पर समाप्त होता है।

निरीक्षण के दौरान बांगर ने देखा कि कुल 31 खंभों का निर्माण पूरा हो चुका है और 30 में से 20 स्पैन का काम भी हो गया है। कुल कार्य का लगभग 75 प्रतिशत पूरा हुआ है। शेष 10 स्पैन, बीम लगाने, डेक स्लैब डालने और पहुंच मार्ग के कार्य बाकी हैं। बीएमसी का लक्ष्य मानसून से पहले फ्लाईओवर को पूरा कर 31 मई 2026 तक यातायात के लिए खोलना है। इसलिए, जनशक्ति और मशीनरी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

ठेकेदार की धीमी गति पर असंतोष जताते हुए बांगर ने 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। साथ ही, दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी में फ्लाईओवर लैंडिंग तक पहुंचने वाली सड़क के लिए जल निकाय, सीवेज नालियां और अदानी पावर के ट्रांसफार्मर बाधा बन रहे हैं। इन्हें तत्काल स्थानांतरित या नए निर्माण का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा, बांगर ने गोरेगांव के दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी क्षेत्र में दोहरी सुरंगों के निर्माण के लिए ‘लॉन्चिंग शाफ्ट’ की खुदाई स्थल का दौरा किया। इस परियोजना में अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) का उपयोग होगा। शाफ्ट की लंबाई लगभग 200 मीटर, चौड़ाई 50 मीटर और गहराई 30 मीटर है। खुदाई का पहला चरण पूरा हो चुका है। अब क्रैडल का काम शुरू हो गया है। 800 मीट्रिक टन और 350 मीट्रिक टन क्षमता वाली क्रेनों की जरूरत है। 350 मीट्रिक टन वाली क्रेन साइट पर पहुंच चुकी है, दूसरी फरवरी अंत तक आने की उम्मीद है।

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