June 9, 2026
Entertainment

फंडिंग की कमी से शुरू हुआ सफर, मनोज बाजपेयी ने बताया कैसे बनीं ‘भोंसले’, ‘तांडव’ और ‘जोरम’ जैसी फिल्में

Manoj Bajpayee reveals how films like ‘Bhonsle’, ‘Tandav’ and ‘Joram’ began their journey due to lack of funding.

अभिनेता मनोज बाजपेयी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर उत्साहित हैं। फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त अभिनेता अपनी कुछ पुरानी और यादगार फिल्मों ‘भोंसले’, ‘तांडव’ और ‘जोरम’ के बनने के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि कई मुश्किल हालात और आर्थिक चुनौतियों ने इन फिल्मों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि कई मुश्किल हालात और आर्थिक चुनौतियों ने इन फिल्मों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही इन तीनों के बीच के गहरे कनेक्शन के बारे में भी बात की।

आईएएनएस से बातचीत में मनोज बाजपेयी ने बताया कि फिल्म मेकर देवाशीष मखीजा सिनेमा में नए थे। उनके साथ सबसे पहले ‘तांडव’ शॉर्ट फिल्म बनी। मनोज ने कहा, “देवाशीष के पास संसाधन कम थे। हमने सिर्फ 30-35 लाख रुपए में ‘तांडव’ बनाई। यह फिल्म यूट्यूब पर बेहद सफल रही और कई अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स भी जीते।”

‘तांडव’ की सफलता के बाद ‘भोंसले’ फिल्म बनी। मनोज बाजपेयी ने फंड जुटाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मैं फंड का इंतजाम करने में लगा रहा। आखिरकार ‘भोंसले’ बन पाई।” ‘भोंसले’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर भी मिला था।

‘भोंसले’ की शूटिंग के दौरान ही देवाशीष मखीजा ने मनोज को ‘जोरम’ की कहानी सुनाई। बाद में यह फिल्म बनी, जिसे जी स्टूडियोज ने प्रोड्यूस किया। मनोज बाजपेयी ने ‘जोरम’ को अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक बताया। उन्होंने कहा, “इस फिल्म ने मेरी परीक्षा ली। शूटिंग बहुत गहरी और भावुक थी। मैं लड़खड़ा गया था, लेकिन इस परफॉर्मेंस पर मुझे बहुत गर्व है।”

मनोज बाजपेयी ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष और विश्वास के साथ छोटी शुरुआत भी बड़ी उपलब्धियों की नींव बन सकती है। ‘तांडव’ से शुरू हुई यह यात्रा ‘भोंसले’ और ‘जोरम’ तक पहुंची, जहां हर फिल्म ने उन्हें नई चुनौतियां दीं और बेहतर अभिनेता बनाया। अभी मनोज बाजपेयी अपनी नई फिल्म ‘गवर्नर’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। फिल्म में वह आरबीआई गवर्नर का किरदार निभा रहे हैं। विपुल अमृतलाल शाह प्रोड्यूस की गई यह फिल्म 12 जून को रिलीज होने वाली है। इसे चिन्मय मांडलेकर ने डायरेक्ट किया है।

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