महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के अधिकारियों ने 19 मार्च को एक विशाल पुष्प-साहित्यिक-कला-पाक-सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रंग महोत्सव-2025’ आयोजित करने का निर्णय लिया है।
11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पुष्प महोत्सव ‘रंग बहार’, रचनात्मक दृश्य कला शो ‘रंग सृजन’, संगीत कार्यक्रम ‘रंग सुर’, साहित्यिक कार्यक्रम ‘रंग कलम’, थिएटर उत्सव ‘रंग रास’, पाककला कार्यक्रम ‘रंग व्यंजन’ और सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रंग तरंग’ शामिल हैं।
एमडीयू के शिक्षकों के साथ-साथ गैर-शिक्षण कर्मचारी संघों ने धन के घोर दुरुपयोग और बर्बादी का हवाला देते हुए इस बड़े कार्यक्रम के आयोजन का विरोध किया था। इसके बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। हालांकि, अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों और कर्मचारियों के विरोध के बावजूद कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
एमडीयू के कुलपति प्रोफेसर राजबीर सिंह ने कहा कि ‘रंग महोत्सव’ का उद्देश्य विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा के विविध अवसर प्रदान करना है।
उन्होंने कहा, “इससे उन्हें अपनी साहित्यिक-सांस्कृतिक-संगीतमय-पाककला के साथ-साथ कार्यक्रम प्रबंधन और संगठनात्मक कौशल दिखाने में मदद मिलेगी और विश्वविद्यालय को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में ब्रांडिंग करने में भी मदद मिलेगी।”
इस बीच, एमडीयू शिक्षकों के साथ-साथ गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संघों ने राज्य विश्वविद्यालयों पर भारी कर्ज के बोझ के बावजूद इस तरह के भव्य आयोजन का विरोध किया है।
एमडीयू शिक्षक संघ (एमडीयूटीए) के अध्यक्ष डॉ. विकास सिवाच ने कहा, “हरियाणा के 22 राज्य विश्वविद्यालयों पर इस समय करीब 6,625 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बावजूद एमडीयू के अधिकारी छात्रों से एकत्र की गई भारी धनराशि को बेरहमी से बर्बाद करने पर अड़े हुए हैं। कोई अन्य राज्य विश्वविद्यालय इस तरह के भव्य आयोजन नहीं करता है।”
उन्होंने कहा कि एमडीयूटीए और गैर-शिक्षण कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि हरियाणा के राज्यपाल एवं एमडीयू के कुलाधिपति, राज्य के मुख्यमंत्री और शीर्ष सरकारी अधिकारियों से मिलकर अपनी चिंताओं से अवगत कराएंगे तथा सार्वजनिक धन के इस तरह के घोर दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग करेंगे।