मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को नई ‘आवश्यक औषधियों’ की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। मंगलवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि नई सूची की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “निर्माताओं से सीधे खरीद की ओर बढ़ना केवल लागत कम करने का उपाय नहीं है, बल्कि बिचौलियों से होने वाली देरी को खत्म करने और अधिक पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने की एक रणनीतिक पहल है।” उन्होंने कहा कि बिचौलियों को दरकिनार करके, राज्य का लक्ष्य जीवन रक्षक दवाओं का निरंतर स्टॉक सुनिश्चित करना है, जिसके लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के नमूने लेने और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा और राज्य सरकार पर्याप्त कर्मचारी, प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराएगी। पहले चरण में, ऐसे प्रकोष्ठ आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा में स्थापित किए जाएंगे।
सुखु ने हिमाचल प्रदेश में दवा कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं की गुणवत्ता की कड़ी जांच सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को राज्य में भारत के औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम, 1945 की अनुसूची-एम के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने दोहराया कि मरीजों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


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