नई दिल्ली, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने तुर्की की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से भेंट की। इस दौरान ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और रक्षा उद्योग समेत कई क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
राष्ट्रपति एर्दोगन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करके मुलाकात की जानकारी साझा की।
एर्दोगन ने पोस्ट में लिखा, ”मेरे प्रिय मित्र, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ऐतिहासिक महत्व की यात्रा के अवसर पर तुर्की में उनकी मेजबानी करके मुझे बेहद खुशी हुई।”
राष्ट्रपति एर्दोगन ने बताया कि पीएम कार्नी की महत्वपूर्ण यात्रा में हमने तुर्की और कनाडा के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत हम आने वाले समय में ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और रक्षा उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू करना चाहते हैं। साथ ही हमने व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए इस वर्ष के अंत से पहले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
एर्दोगन ने कहा, ”हमारा लक्ष्य है कि वर्तमान में लगभग तीन अरब डॉलर के आसपास रहने वाले द्विपक्षीय व्यापार को पहले पांच अरब डॉलर और उसके बाद 10 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।”
उन्होंने कहा कि आज हमने तीसरे देशों में संयुक्त निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की। हमारा मानना है कि अफ्रीका से लेकर लैटिन अमेरिका, मध्य एशिया से लेकर सुदूर पूर्व तक के व्यापक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।
एर्दोगन ने बताया कि हम दोनों सहयोगी देश रक्षा उद्योग में साझेदारी के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। इसका उदाहरण हाल ही में अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी देखने को मिला था। आज रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। ऊर्जा क्षेत्र में भी हमारे मंत्रालयों के बीच स्वीकृत ऊर्जा सहयोग पर संयुक्त घोषणा इस क्षेत्र की बड़ी संभावनाओं की ओर संकेत करती है। इसमें परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि आज हमने गाजा, यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र समेत कई क्षेत्रीय मुद्दों पर ताजा घटनाक्रमों की भी समीक्षा की। गाजा के मुद्दे पर हम मानते हैं कि कनाडा और कुछ अन्य सहयोगी देशों की ओर से अवैध बस्तियों (सेटलमेंट्स) के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध इजरायली सरकार द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों को रोकने की दिशा में एक सही कदम हैं।
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए कनाडा आगे भी इसी रुख को बनाए रखेगा।

