राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, पानीपत के आर्य पीजी कॉलेज और सोनीपत के डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (डीबीएएनएएलयू) के मूट कोर्ट हॉल में प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिक्षा, सामाजिक संगठनों, उद्योग और विधि जगत सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख नागरिकों ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया।
सोनीपत में, आरएसएस ने राय स्थित डीबीएएनएलयू के मूट कोर्ट हॉल में एक प्रमुख नागरिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम) के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह ओबेरॉय ने की। प्रांत प्रचारक प्रमुख राजेश कुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे, जबकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. वीरेंद्र सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
पानीपत में, आरएसएस के प्रांत सह कार्यवाह डॉ. प्रीतम सिंह और विश्व हिंदू परिषद की प्रांत सह मंत्री डॉ. अनीता मान ने मुख्य वक्ताओं के रूप में भाग लिया, जबकि स्वामी अरुण दास जी महाराज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
पहले सत्र में डॉ. प्रीतम सिंह ने श्रोताओं को आरएसएस के इतिहास से अवगत कराया और इसके सौ वर्षों के सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आरएसएस की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्र और समाज के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से की थी। संगठन के शताब्दी भर के सफर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस ने समाज को संगठित करने, सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।
डॉ. अनीता मान ने पंच परिवर्तन की अवधारणा को समझाया और कहा कि ये परिवर्तन समाज के लिए प्रासंगिक और व्यावहारिक मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
इस अवसर पर स्वामी अरुण दास जी महाराज ने समाज से पंच परिवर्तन का संदेश हर घर तक पहुंचाने की अपील की। पानीपत स्थित आरएसएस के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के जनसंपर्क कार्यक्रम समाज में राष्ट्रीय भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।
आरएसएस की गतिविधियों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय विचार पर साहित्य, सेवा भारती की पहल और गाय आधारित पंचगव्य से बने उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल शामिल थे, जो इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। सोनीपत में डॉ. हरेंद्र सिंह ओबेरॉय ने कहा कि आरएसएस का मूल दर्शन समाज को एकजुट करना है और इससे बड़ा कोई आदर्श नहीं हो सकता।
मुख्य वक्ता राजेश कुमार ने आरएसएस के 100 वर्षों के सफर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ भी है और उन्होंने उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
डॉ. वीरेंद्र सिंह ने पंच परिवर्तन विषय पर बोलते हुए कहा कि परिवार प्रबोधन (परिवार का जागरण) इसका सर्वोपरि आयाम है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली पीढ़ियों ने दादा-दादी द्वारा सुनाई गई कहानियों के माध्यम से मूल्यों और मौखिक परंपराओं को आत्मसात किया, जिनकी जगह अब मोबाइल फोन और टेलीविजन ने ले ली है।


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