1980 के दशक के मध्य में एक युवा अभिनेता अपनी लगातार पांच-छह फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद इतना निराश हो चुका था कि उसने बॉलीवुड को हमेशा के लिए अलविदा कहने का मन बना लिया था। यह युवा अभिनेता कोई और नहीं, बल्कि मोहनीश बहल थे।
फिल्मों में करियर खत्म मानकर उन्होंने विमानन क्षेत्र में जाने का फैसला किया और अपना कमर्शियल फ्लाइंग लाइसेंस प्राप्त करने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन एक दिन जिम में उनकी मुलाकात उभरते हुए अभिनेता सलमान खान से हुई, जो उनके अच्छे दोस्त बन गए। जब राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ (1989) के लिए कास्टिंग चल रही थी, तब सलमान खान ने ही खलनायक ‘जीवन’ के रोल के लिए मोहनीश बहल के नाम की सिफारिश की थी। इस एक अवसर ने उनके समाप्त हो चुके करियर को पुनर्जीवित कर दिया।
मोहनीश बहल का जन्म 14 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध रही है। उनकी मां, भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नूतन थीं और उनके पिता लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल थे। मोहनीश बहल की नानी शोभना समर्थ और मौसी तनुजा भी जानी-मानी अभिनेत्रियां थीं, जबकि काजोल उनकी चचेरी बहन हैं।
उन्होंने 1983 में फिल्म ‘बेकरार’ से सह-अभिनेता के रूप में शुरुआत की, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। इसके बाद ‘तेरी बाहों में’ (1984) भी फ्लॉप रही। रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्म ‘पुराना मंदिर’ (1984) हिट तो हुई, लेकिन उस दौर में हॉरर फिल्मों को ‘बी-ग्रेड’ सिनेमा माना जाता था, इसलिए इससे मोहनीश बहल के करियर को कोई खास फायदा नहीं हुआ।
मोहनीश बहल अपनी किशोरावस्था के सभी दिल टूटने के किस्से अपनी मां से साझा करते थे और नूतन हमेशा उन्हें समझाती थीं कि समय बीत जाता है, जीवन कभी खत्म नहीं होता।
‘मैंने प्यार किया’ (1989) की ऐतिहासिक सफलता ने मोहनीश बहल को बॉलीवुड में स्थापित एक्टर बना दिया, लेकिन उनके करियर का असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब राजश्री प्रोडक्शंस ने ही उनकी नकारात्मक छवि को तोड़कर उन्हें एक ‘संस्कारी और आदर्श भाई’ के रूप में पेश किया। ‘हम आपके हैं कौन’ (1994) और ‘हम साथ-साथ हैं’ (1999) ने उन्हें भारतीय परिवारों का चहेता बना दिया।
बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद मोहनीश बहल ने टेलीविजन की ओर रुख किया और वहां भी अपार सफलता प्राप्त की। 2002 में उन्होंने स्टार प्लस के बहुचर्चित मेडिकल ड्रामा ‘संजीवनी: अ मेडिकल बून’ में डॉ. शशांक गुप्ता की भूमिका निभाई। ‘संजीवनी’ भारतीय टेलीविजन पर एचआईवी और अन्य गंभीर चिकित्सा मुद्दों पर संवेदनशीलता से बात करने वाला पहला शो था।
उन्हें 2003 में ‘इंडियन टेलीविजन एकेडमी’ (आईटीए) का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिलाया। बाद में उन्होंने ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ (2011) में डॉ. आशुतोष की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा, हालांकि लंबे और थका देने वाले शूटिंग शेड्यूल के कारण उन्हें पीठ में गंभीर दर्द की समस्या हो गई, जिसके चलते उन्हें बीच में ही यह शो छोड़ना पड़ा।
2019 में 17 साल बाद उन्होंने ‘संजीवनी 2’ के साथ उसी प्रतिष्ठित डॉ. शशांक के रूप में वापसी की, जिसने पुरानी यादों को एक बार फिर से ताजा कर दिया।
निजी जीवन में, मोहनीश बहल ने 23 अप्रैल 1992 को अभिनेत्री एकता सोहिनी (आरती बहल) से विवाह किया। उनकी दो बेटियां हैं, जिनका नाम प्रनूतन और कृषा हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रनूतन ने भी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 2019 में सलमान खान द्वारा निर्मित फिल्म ‘नोटबुक’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।
मोहनीश बहल की आखिरी फिल्म साल 2019 में आई ‘पानीपत’ थी। इन दिनों वह अभिनय के बजाय अपने परिवार की प्रॉपर्टी और व्यावसायिक कामों को संभाल रहे हैं तथा अपनी निजी जिंदगी पर ध्यान दे रहे हैं।

