January 27, 2026
National

नर्मदा जयंती : घाटों पर उमड़ी भारी भीड़, श्रद्धालुओं ने ‘मां’ के आंचल को स्वच्छ रखने का लिया संकल्प

Narmada Jayanti: Huge crowds gathered at the ghats, devotees pledged to keep the ‘mother’s’ lap clean.

मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली मां नर्मदा की रविवार को जयंती पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। नरसिंहपुर जिले से होकर बहती यह नदी न सिर्फ इलाके की उर्वरा भूमि को समृद्ध बनाती है, बल्कि पूरे प्रदेश की सुंदरता और जीवन धारा भी इसी से जुड़ी हुई है। अवतरण दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पदयात्राओं और शोभायात्राओं के साथ नर्मदा की ओर उमड़ पड़े।

नरसिंहपुर के सतधारा समेत सभी घाटों पर भक्तों का सैलाब देखने को मिला। इस मौके पर गणतंत्र दिवस की झलक भी देखने को मिली, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं तिरंगे की चूनर मां नर्मदा को अर्पित कर रहे थे।

मां नर्मदा का यह पर्व केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। उनके जल से ही प्रदेश के लोगों की प्यास बुझती है और जमीन उर्वरा बनती है। इसलिए उनकी निर्मलता और पवित्रता बनाए रखना हर भक्त के लिए जरूरी है। आज के दिन भक्त केवल पूजा ही नहीं करते, बल्कि यह संकल्प भी लेते हैं कि वे मां नर्मदा के जल और घाटों को साफ और स्वच्छ रखेंगे।

इस अवसर पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी श्रद्धालु पैदल चलकर घाटों पर पहुंचे। सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के आदेगांव से आए गोलू कुशवाहा ने बताया कि वह 2017 से हर साल पैदल नर्मदा जयंती में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि मां नर्मदा की कृपा इतनी बड़ी है कि मांगने से पहले ही मां अपने भक्तों के भंडार भर देती हैं। इस साल घाटों पर इतनी बड़ी भीड़ थी कि गांवों के रास्ते खाली हो गए।

गोलू ने आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि मां नर्मदा की कृपा हमेशा सबके ऊपर बनी रहे और वे भविष्य में भी इसी भक्ति के साथ आते रहेंगे।

कार्यक्रम में स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान की मेंटर शिवानी विश्वकर्मा ने बताया कि घाटों पर आने वाले लोग अक्सर पाउच, पानी की बोतल या पॉलिथीन छोड़ जाते हैं। जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया जा रहा है कि श्रद्धा के साथ स्वच्छता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर हम मां के जल और घाटों में कचरा डालते हैं, तो वह आस्था और श्रद्धा के विपरीत है। श्रद्धा अच्छी है, लेकिन स्वच्छता उससे भी ज्यादा जरूरी है।

स्वच्छता अभियान के अन्य मेंटर, भगवान उपाध्याय ने कहा, “त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदा।” उनका कहना था कि नर्मदा जयंती पर नारियल फोड़ना या स्नान करना केवल दिखावे का पुण्य नहीं है। असली पुण्य तब मिलता है, जब हम मां के आंचल को पवित्र बनाए रखें और वहां गंदगी न फैलाएं।

उन्होंने लोगों से कहा कि हर व्यक्ति आज संकल्प ले कि घाट पर आने के बाद भी कचरा अपने साथ ले जाएगा और कोई भी पॉलीथिन या गंदगी न छोड़ेंगे। ऐसा करने से न केवल घाट और नदी का वातावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि हमारी आस्था भी और मजबूत होगी।

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