भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने कृषि और पशुधन क्षेत्रों में अनुसंधान, मूल्यवर्धन और उद्यमिता में सहयोग को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमपी), लखनऊ के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन सीएसआईआर-सीआईएमपी, लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले के दौरान हस्ताक्षरित किया गया।
आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह और सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध के त्रिवेदी ने लखनऊ में सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एन कलैसेलवी की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
डॉ. धीर सिंह ने फसल विविधता और चक्रीय अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि उत्पादों का कोई भी उप-उत्पाद व्यर्थ न जाए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फसलों, पशुधन और मत्स्य पालन में पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। समझौता ज्ञापन के तहत साझेदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उप-उत्पादों का प्रभावी उपयोग उद्यमिता को बढ़ावा दे सकता है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में बढ़ते शहरीकरण और भूमि की कमी के कारण भारत में एकीकृत कृषि और सतत विकास के लिए कृषि भूमि का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने संस्थान में चल रहे दूध से एलर्जी, मांसपेशियों की वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाने और अन्य आणविक अध्ययनों पर शोध का भी उल्लेख किया।
इन पहलों से कृषि के भविष्य और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। डॉ. कलाइसेल्वी ने सुगंध मिशन में सराहनीय कार्य के लिए सीएसआईआर-सीआईएमएपी, लखनऊ के कार्यों की सराहना की और एनडीआरआई के साथ अनुसंधान में सहयोग को प्रोत्साहित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ‘त्रिवेणी संगम’ जैसे कार्यक्रम, जिनमें किसान, उद्योगपति/उद्यमी और वैज्ञानिक संवाद कर रहे हैं, देश को महान बनाने के साझा लक्ष्य के लिए हैं।

