January 12, 2026
National

नॉन-वेज खाने पर एनएचआरसी सख्त, रेलवे-एफएसएसएआई और पर्यटन मंत्रालय से मांगी नई एटीआर

NHRC strict on eating non-veg food, seeks new ATR from Railways-FSSAI and Tourism Ministry

भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन को लेकर उठे विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और पर्यटन मंत्रालय से दोबारा विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की मांग की है। यह मामला 21 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है, जिस पर आयोग ने 5 जनवरी 2026 को सुनवाई की।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि भारतीय रेल और आईआरसीटीसी द्वारा केवल हलाल तरीके से तैयार किया गया मांस परोसा जा रहा है। इससे न केवल यात्रियों की खाने की पसंद और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है, बल्कि यह हिंदू अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के उन लोगों के रोजगार और आजीविका पर भी असर डालता है, जो पारंपरिक रूप से मांस व्यापार से जुड़े रहे हैं।

शिकायत में कहा गया कि इस व्यवस्था से हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन का विकल्प नहीं मिलता, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(जी), 21 और 25 का उल्लंघन है।24 नवंबर को आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में एनएचआरसी ने इस मामले में संज्ञान लिया था और रेलवे बोर्ड को दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

इसके बाद आईआरसीटीसी ने 10 दिसंबर को रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि उसके पास कोई ऐसी नीति नहीं है, जिसमें हलाल प्रमाणन अनिवार्य हो और वह केवल एफएसएसएआई के मानकों का पालन करता है। हालांकि, एनएचआरसी ने इस रिपोर्ट को अधूरी और पारदर्शिता से रहित बताया। आयोग ने कहा कि यात्रियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो नॉन-वेज भोजन खा रहे हैं, वह हलाल है या झटका। यदि केवल हलाल मांस परोसा जाता है, तो इससे गैर-मुस्लिम समुदायों के रोजगार अवसर सीमित हो सकते हैं।

आयोग ने सिख रीहत मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि बपतिस्मा प्राप्त सिखों के लिए मुस्लिम तरीके से काटे गए जानवर का मांस खाना वर्जित है। ऐसे में जानकारी का खुलासा जरूरी है। आईआरसीटीसी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-से ठेकेदार हलाल, झटका या दोनों तरह का मांस परोस रहे हैं।

आयोग ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह चार हफ्ते के भीतर नई एटीआर दाखिल करे, जिसमें सभी रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में भोजन सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की सूची हो और यह भी स्पष्ट किया जाए कि वे हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोसते हैं।

इसके साथ ही, एफएसएसएआई को अपने गुणवत्ता मानकों में इस विषय को शामिल करने और पर्यटन मंत्रालय को होटल स्टार रेटिंग और वर्गीकरण में मांस काटने की विधि के खुलासे से जुड़े प्रावधान जोड़ने पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। एनएचआरसी ने साफ किया है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता, समानता और यात्रियों की स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

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