राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम ने पिछले साल 10 सितंबर को यहां एक घर में हुए दोहरे विस्फोटों के सिलसिले में शुक्रवार को जीदा गांव का दौरा किया, जिसमें 19 वर्षीय कानून के छात्र गुरप्रीत सिंह और उनके पिता जगतर सिंह घायल हो गए थे।
सूत्रों के अनुसार, एनआईए के एक अधिकारी ने गुरप्रीत के परिवार से मोबाइल फोन खरीदने और मामले से संबंधित अन्य मामलों के बारे में जानकारी मांगी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने कमीशन एजेंट से कुछ अग्रिम राशि लेकर गुरप्रीत को फोन खरीदने के लिए पैसे दिए थे। टीम ने विस्फोटों से पहले गुरप्रीत की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई।
सूत्रों के मुताबिक, एनआईए 24 फरवरी को गुरप्रीत सिंह के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। गुरप्रीत फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। परिवार को सूचित कर दिया गया है कि वे कार्यवाही के लिए वकील नियुक्त कर सकते हैं।
पहले विस्फोट में गुरप्रीत का दाहिना हाथ काटना पड़ा, जबकि दूसरे विस्फोट में उसके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का खुलासा तब हुआ जब अगले दिन एक निजी अस्पताल ने पुलिस को चोटों की जानकारी दी।
शुरुआती जांच से पता चला कि गुरप्रीत ऑनलाइन सामग्री और विस्फोटकों के साथ प्रयोग करने के कारण स्व-कट्टरपंथी बन गया होगा। खबरों के अनुसार, वह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का कट्टर अनुयायी था और उसने मसूद और अन्य चरमपंथियों का अनुसरण करने के लिए एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाया था।
पुलिस ने पहले बताया था कि उसने बम बनाने से संबंधित वीडियो देखे थे और ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए रसायन मंगवाए थे। गुरप्रीत के खिलाफ नेहियानवाला पुलिस स्टेशन में विस्फोटक अधिनियम और बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने कहा कि उन्हें आज एनआईए टीम के आने की जानकारी नहीं थी।
इस मामले की प्रारंभिक जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में एनआईए ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली।


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