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निंबालकर हत्याकांड : आरोपियों को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी सीबीआई

Nimbalkar murder case: CBI to challenge in High Court the decision to acquit the accused.

20 जून । पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद अब सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वह मुंबई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेगी।

दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवनराजे निंबालकर की 3 जून 2006 को नवी मुंबई में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनके चालक समद काजी की भी मौत हो गई थी। उस समय इस हत्याकांड ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद 20 अगस्त 2009 को पहली चार्जशीट और 4 जून 2010 को पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी ने इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सांसद पद्मसिंह बाजीराव पाटिल समेत कुल नौ आरोपियों को नामजद किया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी सरकारी गवाह भी बन गया था।

करीब दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत (सेशन कोर्ट-55) ने 20 जून 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में सबूतों की कमी और जांच में कई महत्वपूर्ण खामियों का हवाला दिया।

हालांकि, सीबीआई इस फैसले से सहमत नहीं है। जांच एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ मजबूत और पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए थे। इसी आधार पर सीबीआई अब ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

पवनराजे निंबालकर हत्याकांड महाराष्ट्र के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्या से जुड़े मामलों में से एक माना जाता है। 3 जून 2006 को हुई इस दोहरे हत्याकांड की गूंज वर्षों तक राजनीतिक और कानूनी गलियारों में सुनाई देती रही। अब ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट में सीबीआई की अपील पर क्या फैसला आता है।

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