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राहुल गांधी के खिलाफ निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, सदस्यता रद्द करने की मांग

Nishikant Dubey wrote a letter to the Lok Sabha Speaker against Rahul Gandhi, demanding cancellation of his membership.

12 फरवरी । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पत्र लिखा और उनके आचरण पर सवाल खड़े किए। निशिकांत दुबे ने जांच के बाद राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने की भी मांग की।

निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में लिखा, “राहुल गांधी ने देश के पूरे नैतिक ताने-बाने को तोड़ दिया है। राहुल गांधी कैसे ‘भारत को अंदर से अस्थिर करने वाले ठग गैंग’ का एक हिस्सा हैं और कैसे संसद के अंदर एवं बाहर उनके सोचे-समझे काम देश के लिए नुकसानदायक हैं, यह देश के कोने-कोने में गंभीर चर्चा का विषय है।” भाजपा सांसद ने दो पन्नों के पत्र में राहुल गांधी के चार गलत कामों को भी गिनाया।

उन्होंने पत्र में लिखा, “यह बात सब जानते हैं कि न तो देश का कोई नागरिक और न ही कोई नेता या अधिकारी कोई भी ऐसा कुछ नहीं करता है जिससे हमारी सेना का सम्मान कम हो। हालांकि, ये नैतिक मूल्य राहुल गांधी पर लागू नहीं होते। लोकसभा में 11 फरवरी को दिए गए उनके भाषण से यह बिल्कुल साफ है कि उन्होंने चालाकी से पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे का नाम घसीटा।”

भाजपा सांसद ने लिखा, “ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी ने पहली बार सरकार को बदनाम करने के मकसद से विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। चाहे वह रक्षा क्षेत्र हो, वित्त हो, कॉमर्स हो या विदेश मामले, राहुल गांधी की संसद और दूसरे सार्वजनिक मंचों पर बेबुनियाद और गलत बातें उठाकर लोगों की भावनाओं को भड़काने की आदत है। उनके इस अड़ियल रवैये की वजह उनका ‘सोरोस फाउंडेशन’ का एक्टिव एजेंट होना है, जो दुनिया भर में अपने क्लाइंट देशों के फायदे के लिए अलग-अलग देशों को अस्थिर करने के लिए बदनाम है।”

निशिकांत दुबे ने नेता प्रतिपक्ष के भाषण का जिक्र करते हुए कहा, “राहुल गांधी ने अलग-अलग भारतीय कॉर्पोरेट्स का जिक्र किया और एक गलत तस्वीर पेश की कि बड़े बिजनेस घरानों के साथ उनकी (भाजपा) मिलीभगत के कारण हमारा बैंकिंग सिस्टम खत्म हो गया है। राहुल गांधी की ये सभी कोशिशें देश को अंदर से अस्थिर करने के अलावा और कुछ नहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए उन्होंने न सिर्फ भारत के चुनाव आयोग पर बल्कि सुप्रीम कोर्ट पर भी बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। बिना किसी ठोस सबूत के सरकार की गरिमा को कम करने की कोशिश की और जॉर्ज सोरोस और सैम पित्रोदा के साथ मिलीभगत से कई दूसरे संस्थानों को बदनाम किया है। एक सांसद और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनके सभी ‘गलत व्यवहार’ की तुरंत जांच की जाए, ताकि उन्हें लोकसभा से तुरंत निकाला जा सके।”

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