March 30, 2026
National

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव राजनीति के स्तर में गिरावट: राम कृपाल यादव

No-confidence motion against Lok Sabha Speaker is a drop in the level of politics: Ram Kripal Yadav

12 मार्च । बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पहले से ही असफल होना तय था। उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कदम से राजनीति के स्तर में गिरावट साफ दिखाई देती है।

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “शुरू से ही साफ था कि ऐसा ही होगा। कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी सदस्यों द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव असफल होना तय था। यह राजनीतिक आचरण में आई बड़ी गिरावट को दिखाता है और खासकर कांग्रेस पार्टी का स्तर बहुत नीचे गिर गया है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिणाम पहले से ही स्पष्ट था तो फिर ऐसा प्रस्ताव लाने का मकसद क्या था? राम कृपाल यादव ने कहा, “जब आपको पहले से पता है कि परिणाम क्या होगा, तब भी आप ऐसा कदम उठाते हैं। आखिर इससे आप हासिल क्या करना चाहते हैं? जो व्यक्ति संवैधानिक पद पर बैठा है, उसका सम्मान होना चाहिए, चाहे वह पहले किसी भी पार्टी से जुड़ा हो।”

राम कृपाल यादव ने कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ इस तरह के कदम बहुत कम देखने को मिले हैं। जहां तक मुझे याद है, पहले लोकसभा स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके अलावा मुझे याद नहीं पड़ता कि किसी स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया हो। विपक्ष ने पहले कभी ऐसा कदम उठाने की कोशिश नहीं की।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्पीकर को निशाना बनाया जाए। संसद में विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन इस तरह स्पीकर को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने ऐसा कौन सा गलत काम किया है? क्या उन्होंने कोई साजिश की है? स्पीकर वही फैसला देते हैं जो उन्हें सही लगता है। अब सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा अगर फिर से ऐसा प्रयास किया गया।

दरअसल, लोकसभा ने बुधवार को करीब 13 घंटे चली लंबी बहस के बाद स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव विपक्षी दलों द्वारा लाया गया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पीकर सदन के संचालन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में असफल रहे हैं। हालांकि बहस के दौरान सरकार ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया।

इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पीकर का बचाव करते हुए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव लाना संसदीय राजनीति में दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।

अमित शाह ने कहा, “लोकसभा का स्पीकर किसी एक पार्टी का नहीं होता, बल्कि पूरे सदन का होता है। वह सभी सदस्यों के अधिकारों का संरक्षक होता है। ऐसे में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना किसी साहसिक कदम के रूप में नहीं देखा जा सकता।”

उन्होंने बताया कि बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य चर्चा में शामिल हुए, जिसके बाद प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह की घटना आम नहीं है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव करीब चार दशक बाद आया है। यह कोई साधारण घटना नहीं है।

अमित शाह ने यह भी चेतावनी दी कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा, “लोकसभा भारत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है और इसकी विश्वसनीयता सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। जब इस संस्था के प्रमुख की ईमानदारी पर सवाल उठाया जाता है, तो इससे हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े होते हैं।”

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