10 मार्च । लोकसभा में कांग्रेस ने मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि हमें यह प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए खुशी नहीं हो रही है क्योंकि ओम बिरलाजी के साथ हमारे व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध हैं। हालांकि लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें ऐसा करना पड़ रहा है। यह ओम बिरला जी पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस सदन के अंदर हर सदस्य का ये कर्तव्य है कि संसद की गरिमा, संसद की मर्यादा और संसद के कानून और नियमों को बचाया जाए। इस कर्तव्य के अनुसार आज हम ये अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से ओम बिरलाजी पर हम हमला नहीं बोलता चाहते हैं। ये सदन की गरिमा को बचाने के लिए, संविधान को बचाने के लिए और भारत के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इस वजह से हम ये अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।
बता दें कि कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से सदन में अविश्वास प्रस्ताव को पेश किया। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान ‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसे लेकर असंतोष बढ़ा।
प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में एक नया विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है।


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